अब भीड़ भले ही कितनी भी उग्र हो जाए और पुलिस के सामने गोली चलाने की नौबत आ जाए, तो भी फायरिंग में किसी आम आदमी की जान नहीं जाएगी।
पिछले दिनों आजमगढ़ में पुलिस की गोली से मारे गए एक प्रदर्शनकारी की मौत से सबक लेते हुए उच्च अधिकारियों ने पुलिस को नॉन लीथल वीपन का इस्तेमाल करने की नसीहत दी है।
डीजीपी देवराज नागर ने इस संबंध में बैठक कर सभी जोन के आईजी, रेंज के डीआईजी व जिलों के कप्तानों को इसके निर्देश दे दिए हैं।
डीजीपी ने अधिकारियों से कहा है कि वह यह सुनिश्चित कर लें कि उनके कार्यक्षेत्र के सभी थानों में ऐसे असलहों की उपलब्धता हो, जिन्हें नॉन लीथल वीपन की श्रेणी में शुमार किया जाता है।
असलहों की थानों में उपलब्धता सुनिश्चित कराने के बाद इसकी रिपोर्ट डीजीपी मुख्यालय को देने का भी निर्देश दिया है। अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया जाए कि जब भी भीड़ हिंसक रूप धारण करे, जहां तक हो उन्हें शांत करने की कोशिश हो और अगर अपरिहार्य हो तब हल्का बल प्रयोग किया जाए।
पुलिस को गोली चलाने की नौबत आए तो इन्हीं असलहों से गोली चलाई जाए। नॉन लीथल वीपंस में टीयर गैस गन, पंप एक्शन, रबर बुलेट, मिर्ची बम आदि का प्रयोग करने को कहा गया है।
मातहतों को कहा गया है कि ऐसी स्थिति की जानकारी होने पर थाना प्रभारी के साथ आने वाला पुलिस बल इस तरह के असलहों से लैस होना चाहिए।
प्रदेश के तकरीबन 1450 थाने और जीआरपी के कुल 65 थानों, सभी पर इन असलहों की उपलब्धता के लिए कहा गया है। पिछले दिनों ऐसे लगभग 3500 असलहों की खरीद की गई थी।