मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर एक न्यूज चैनल के स्टिंग ऑपरेशन की जांच के लिए
गठित विधानसभा की समिति चैनल को रॉ फुटेज देने के लिए अंतिम मौका दिया है।
फिर भी फुटेज न मिली तो समन जारी किया जाएगा। समिति सदस्यों ने इस संबंध में प्रमुख सचिव न्याय से विचार-विमर्श भी किया।
समिति के अध्यक्ष सतीश निगम की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई बैठक में जानकारी दी गई कि चैनल ने नोटिस भेजने के बावजूद स्टिंग ऑपरेशन की रॉ फुटेज उपलब्ध नहीं कराई।
चैनल ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का हवाला देते हुए फुटेज देने में विधिक अड़चन बताई है। इस पर सभी सदस्यों ने नाराजगी जताई।
उनका कहना था कि स्टिंग आपरेशन की सीडी से कई चीजें साफ नहीं हुईं। इसलिए रॉ फुटेज जरूरी है।
चैनल को चेतावनी देते हुए रॉ फुटेज देने के लिए एक और मौका देने का फैसला हुआ। छह दिसंबर तक रॉ फुटेज नहीं मिलने पर समन जारी किया जाएगा।
पढ़ें-'सरकार बनते ही दंगों का हिसाब लेगी भाजपा'
सदस्यों ने बैठक में मौजूद प्रमुख सचिव न्याय एसके पांडे और सूचना निदेशक प्रभात मित्तल से भी इस संबंध में राय ली।
समिति ने अगली बैठक के लिए छह दिसंबर की तारीख तय है। समिति इस मामले को लंबा लटकाने के पक्ष में नहीं है। कोशिश है कि विधानसभा के अगले सत्र में रिपोर्ट रख दी जाए।
बैठक में मुरादाबाद सेसपा विधायक मो. इरफान, आजमगढ़ से सपा विधायक डॉ. संग्राम यादव व बृजलाल सोनकर, मोदीनगर से रालोद विधायक सुदेश शर्मा और बुलंदशहर से कांग्रेस विधायक दिलनवाज खान मौजूद रहे।
गौरतलब है कि मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर एक खबरिया चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में कद्दावर मंत्री आजम खां का नाम आने के बाद विधानसभा में इसकी सत्यता की जांच कराने का प्रस्ताव पारित किया गया था।
24 सितंबर को जांच समिति के गठन के लिए अधिसूचना जारी करके सपा के चार, बसपा, भाजपा व कांग्रेस के एक सदस्य शामिल किए गए थे।
भाजपा के मनीष असीजा ने समिति से इस्तीफा दे दिया था। उनकी जगह रालोद के सुदेश शर्मा को शामिल किया गया था।
लखनऊ की अन्य खबरों के लिए देखें यहां