छावनी में प्रवेश करने वाले वाणिज्यिक वाहनों से अब प्रवेश शुल्क नहीं वसूला जाएगा। इस पर शनिवार रात से रोक लगा दी गई है। इस बाबत रक्षा मंत्रालय की ओर से आदेश जारी कर लखनऊ सहित देश की सभी 62 छावनियों में प्रवेश शुल्क वसूलने पर रोक लगा दी गई है। इससे अब रोडवेज बसों, कैब, ऑटो आदि को राहत मिल जाएगी। हालांकि, इससे छावनी परिषद को रोजाना 52 हजार रुपये का नुकसान होगा, जिसकी भरपाई को लेकर मंथन शुरू हो गया है।
छावनी परिषद अधिनियम के अंतर्गत आय बढ़ाने के लिए परिषद की ओर से छावनी से गुजरने वाले वाणिज्यिक वाहनों से प्रवेश शुल्क वसूलने की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए एक दशक से टेंडर कर फर्म को जिम्मेदारी सौंपी जाती है। छावनी में आने वाले बड़े वाहनों से 180 रुपये तथा छोटे वाहनों से 30 रुपये प्रति चक्कर वसूला जाता था। कैब इस चार्ज को कस्टमर से वसूलती थीं, जिसकी वजह से कई बार कहासुनी के मामले भी सामने आ चुके हैं। लिहाजा इसे रोकने के लिए रक्षा मंत्रालय को कई बार पत्र भी लिखे गए। परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी विलास एच पवार ने बताया कि शनिवार मध्य रात्रि से इस प्रवेश शुल्क पर रोक लगा दी गई है। पिछले साल इस मद में परिषद को 1.90 करोड़ रुपये की आय हुई थी। हालांकि, छावनी परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष रतन सिंघानिया ने बताया कि प्रवेश शुल्क से छावनी परिषद को प्रतिदिन 51500 रुपये की आय होती थी। ऐसे में जब टैक्स को हटाया जा रहा है तो उसकी भरपाई की भी व्यवस्था होनी चाहिए।