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रोक न सके आवासीय में व्यावसायिक उपयोग, अब मंजूरी की तैयारी

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आवासीय कॉलोनियों में मकानों का व्यावसायिक उपयोग रोकने में एलडीए पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। अब ऐसे भवनों या भूखंडों पर प्रभाव शुल्क लेकर उसके व्यावसायिक उपयोग की अनुमति देने पर विचार चल रहा है। इसके लिए अगली बोर्ड बैठक में प्रस्ताव भी लाया जाएगा। हालांकि, एलडीए के ही कुछ अधिकारी इसके विरोध में हैं। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि इससे आवासीय कॉलोनियों का स्वरूप प्रभावित होगा।
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सोमवार को सचिव पवन कुमार गंगवार ने एलडीए में नियोजित आवासीय कॉलोनियों में प्रभाव शुल्क लेकर गैर आवासीय भू-उपयोग की अनुमति देने को लेकर बैठक की। इसमें नियोजन, अभियंत्रण के अलावा संपत्ति विभाग के अधिकारी भी शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य आवासीय भवनों में व्यावसायिक या दूसरे उपयोग के लिए अनुमति दिए जाने के लिए सुझाव लेना था। सचिव का कहना है कि एलडीए की खुद की कॉलोनियों के अलावा ले-आउट स्वीकृत वाली निजी योजनाओं में महायोजना 2031 में अनुमन्य सुविधाओं व भू-उपयोग के लिए सशर्त अनुमति का परीक्षण कराया जा रहा है। आम लोगों पर इसके व्यापक असर को देखते हुए ही जरूरी प्रस्ताव बोर्ड बैठक में रखें जाएंगे।
पिछली बोर्ड बैठक में मांगी गई थी विस्तृत रिपोर्ट
इससे पहले पिछली बोर्ड बैठक में एलडीए के अधिकारियों ने प्रभाव शुल्क लेकर अनुमति नहीं दिए जाने के लिए एक प्रस्ताव रखा था। इस पर चर्चा के बाद कुछ नामित सदस्यों के आग्रह पर आवासीय में व्यावसायिक उपयोग के लिए संभावनाएं देखते हुए विस्तृत रिपोर्ट बोर्ड बैठक में रखे जाने की मांग की गई थी। बोर्ड के इसी निर्देश के अनुपालन में एलडीए अब इसकी संभावनाओं का आकलन कर रहा है।
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विरोध के चलते रोकी गई अनुमति
2016 में आवासीय में व्यावसायिक उपयोग की अनुमति को 2017 में जन विरोध को देखते हुए रोक दिया गया था। आरडब्ल्यूए से लेकर हर वर्ग में इसका विरोध हुआ। एलडीए की छवि भी इससे खराब हुई। इसके बाद से अनुमति लंबित है। एलडीए के मौजूदा अधिकारियों ने भी इस विरोध को ध्यान में रखते हुए पिछली बोर्ड बैठक में ऐसी अनुमति नहीं दिए जाने का प्रस्ताव रखा था।
किराए की संपत्तियों के लिए बनेगी नीति
एलडीए सचिव ने एक बैठक विकास प्राधिकरणों की किराए की संपत्तियों के निस्तारण के लिए नीति बनाने के लिए ली। इसमें गाजियाबाद, कानपुर के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। सचिव का कहना है कि एक ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। इसके बाद शासन की अनुमति से इसे लागू कर किराए की संपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि एलडीए अब अपनी किराए की संपत्तियों को फ्रीहोल्ड करने या फिर उनसे अवैध कब्जे हटाकर नीलाम करने की कार्रवाई कर रहा है।
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