15 अगस्त को ध्वजारोहण कार्यक्रम में आम ब्यूरोक्रेट फॉर्मल ड्रेस में ही पहुंचे थे। मगर अचानक दो दिन बाद नॉन वर्किंग डे में, वह भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में, साहब लोगों को फॉर्मल ड्रेस में पहुंचने का फरमान।
अफसरों को चौंकना स्वाभाविक था। मगर अपनों में इसके खूब अर्थ तलाशे गए। एक सीनियर अफसर ने व्याख्या करते हुए कहा कि सरकार शायद मीडिया के सामने यह संदेश देना चाहती है कि वह अब नौकरशाहों को अंगुली पर नचाएगी।
एक युवा आईएएस को सस्पेंड किए जाने के बाद आईएएस एसोसिएशन ने जिस तरह आगे आकर मोर्चा संभाला था, सरकार को यह अच्छा नहीं लगा। तभी से लगातार शीर्ष नौकरशाहों को केंद्र में रखकर संदेश दिए जा रहे हैं।
पिछले दिनों कामधेनु डेयरी के शुभारंभ मौके पर सीधे एपीपी निशाने पर आए थे तो इस प्रेस काॅन्फ्रेंस में सारे वरिष्ठ नौकरशाहों को एक लाइन-एक स्टाइल में तलब कर लिया गया।
अब समझने वाले समझें और न समझने वाले थोड़ा इंतजार करें। खास बात ये कि प्रेस काॅन्फ्रेंस में जो आए उन पर तो नजर थी ही, जो नहीं आए उन पर लोगों की खास नजर थी।