लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्घ कॉलेजों में छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले 40 हजार छात्र-छात्राओं के मास्टर डाटा की हार्डकॉपी विश्वविद्यालय को अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। इससे सत्यापन में दिक्कत आएगी, छात्रवृत्ति भी फंस सकती है। डाटा भेजने की अंतिम तारीख 30 दिसंबर है।
लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों की ओर से शैक्षिक सत्र 2024-25 में पढ़ने वाले उत्तर प्रदेश के मूल निवासी छात्रों का ब्योरा देना है। इससे सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति के लिए आवेदन का सत्यापन हो सकेगा। इस संबंध में विवि को समाज कल्याण विभाग की ओर से गत 26 दिसंबर को पत्र जारी कर बताया गया था, कि छात्रों के आवेदन का सत्यापन होना है।
परीक्षा नियंत्रक की ओर से सभी कॉलेजों से 30 दिसंबर तक छात्रों के आवेदन का ब्योरा हर हाल में जमा करने के लिए कहा गया था। इसके बावजूद 40 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं का डाटा कॉलेजों की ओर से विश्वविद्यालय को नहीं भेजा गया है। जबकि प्रत्येक छात्र का डाटा कॉलेज के सक्षम अधिकारी की ओर से सत्यापन के बाद के विश्वविद्यालय में प्रिंटआउट जमा करना है। सोमवार को अंतिम दिन यदि डाटा नहीं भेजा गया तो छात्रों की स्कॉलरशिप पर संकट हो सकता है।
डेढ़ लाख से अधिक है आवेदकों की संख्या
विश्वविद्यालय व संबद्ध महाविद्यालयों में पढ़ने वाले 4.10 लाख छात्र-छात्राओं में स्कॉलरशिप के लिए आवेदकों की संख्या डेढ़ लाख से अधिक है। बताया जा रहा है कि कई ऐसे भी छात्र हैं जिनके आवेदन में त्रुटियां हैं।
जमा करना होगा आवेदन का प्रिंटआउट
अगर सभी संबद्घ कॉलेज अंतिम तिथि तक छात्रों की वास्तविक संख्या के साथ डाटा नहीं भेजेंगे, तो इसके लिए कॉलेज खुद जिम्मेदार होंगे। आवेदन का प्रिंट आउट हर हाल में जमा करना है।
- विद्यानंद त्रिपाठी, परीक्षा नियंत्रक - लविवि