फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अदालती फैसलों के बीच संयोग भी कम नहीं..., 30 सितंबर और एक ही बिल्डिंग

Thu, 01 Oct 2020 11:30 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन
अयोध्या में राम जन्मभूमि व विवादित ढांचा को लेकर अब तक कुल तीन अदालती निर्णय आए हैं। तीनों में अड़चनें भी खूब आईं तो कई मजेदार संयोग भी। राम जन्मभूमि को लेकर सबसे पहले मालिकाना हक पर दीवानी मामले का फैसला ठीक 10 वर्ष पूर्व 30, सितंबर 2010 को आया।
विज्ञापन


वहीं ढांचा ध्वंस के आपराधिक मामले का निर्णय 30, सितंबर 2020 को सुनाया गया। लखनऊ स्थित हाईकोर्ट की पुरानी बिल्डिंग में ही न्यायमूर्ति धर्मवीर शर्मा, न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल व न्यायमूर्ति एसयू खान ने 30 सितंबर, 2010 को फैसला सुनाते हुए जन्मभूमि को तीन भागों में बांटने का आदेश दिया था। बाद में हाईकोर्ट नए भवन में शिफ्ट हो गया और पुरानी बिल्डिंग में विशेष न्यायाधीश की अदालत लगी। यहीं 30 सितंबर, 2020 को ढांचा ध्वंस का निर्णय सुनाया गया।
विज्ञापन

जजों के आखिरी फैसले भी 

दीवानी मामले का फैसला सुनाने वाले तीन जजों की पीठ के सदस्य रहे न्यायमूर्ति धर्मवीर शर्मा का वह आखिरी फैसला था। जन्मभूमि को हिंदू पक्ष को दिए जाने का आदेश 30 सितंबर, 2010 को देने के बाद न्यायमूर्ति शर्मा अगले दिन एक अक्तूबर को सेवानिवृत्त हो गए। इसी मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की पीठ के सदस्य रहे भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने भी अपना कार्यकाल 17 नवंबर, 2019 को खत्म किया और उसके पहले राम जन्मभूमि को हिंदू पक्ष को देने का अपना अंतिम फैसला सुनाया था।

वहीं ढांचा ध्वंस मामले की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार यादव 30 सितंबर, 2019 को रिटायर हो गए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एक साल के लिए उनका कार्यकाल बढ़ा दिया था। विशेष न्यायधीश ने भी अपने कार्यकाल का आखिरी फैसला ढांचा ध्वंस मामले में दिया। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें