लखनऊ। मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब ने बुधवार को मोहनलालगंज के नगराम गांव का दौरा कर भिक्षावृत्ति से जुड़े परिवारों की स्थिति का आकलन किया। सरकार की ओर से चलाई जा रहीं जन कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा की।
उन्होंने प्राथमिक विद्यालय भजाखेड़ा पहुंचकर इन परिवारों से सीधा संवाद किया और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के निर्देश दिए। मंडलायुक्त ने कहा, रोजगार के अवसरों को अपनाकर ही आत्मनिर्भर बना जा सकता है। बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में भी हमें ठोस कदम उठाने होंगे, जिससे उनका भविष्य उज्ज्वल हो सके।
मंडलायुक्त ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि भिक्षावृत्ति करने वाले परिवारों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया जाए। अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन परिवारों को स्वरोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य व राशन जैसी बुनियादी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। विशेष रूप से कौशल विकास एवं रोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने पर जोर दिया, ताकि ये परिवार आत्मनिर्भर बन सकें।
मुख्य विकास अधिकारी अजय जैन ने बताया कि इन परिवारों को आवास, रोजगार, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा एवं चिकित्सा सहायता दी जा रही है। मंडलायुक्त ने योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।
मुख्य विकास अधिकारी को निर्देश दिए कि जिन परिवारों के ई श्रमिक व राशन कार्ड बनाए जा चुके हैं, उनके लिए जल्द से जल्द आयुष्मान कार्ड भी जारी हों। उन्होंने भिक्षावृत्ति करने वाले परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए विशेष कैंप लगाने के निर्देश दिए। इन शिविरों में नगर निगम, सिटी ट्रांसपोर्ट, जीएम डीआईसी, श्रम विभाग, एलडीए व लोक निर्माण विभाग के अधिकारी रोजगार अवसरों की जानकारी देंगे।
206 आधार कार्ड, 110 ई श्रमिक कार्ड बनाए
निरीक्षण में पाया गया कि भिक्षावृत्ति से जुड़े परिवारों की सहायता के लिए कई कदम उठाए गए हैं। भजाखेड़ा, अमवा मूर्तजापुर, गुलरिहा व कनकहा टिकरिया खेड़ा में कैंप लगाकर 206 बच्चों के आधार कार्ड बनाए गए। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने बच्चों का नियमित टीकाकरण किया। प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश लेने वाले बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के विशेष निर्देश दिए गए। निराश्रित पेंशन के सात लाभार्थी चिह्नित किए गए। वृद्धावस्था पेंशन के पांच लाभार्थियों को पेंशन स्वीकृत की गई। चार दिव्यांगजन लाभार्थियों को पेंशन कार्ड जारी किए गए। 110 ई श्रमिक कार्ड जारी किए गए। आजीविका मिशन के तहत दो स्वयं सहायता समूह बनाए गए। इन्हें अगरबत्ती व मोमबत्ती बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।