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एक होंगे सिंचाई व भूमि विकास विभाग

Fri, 10 Jan 2014 10:49 AM IST
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रदेश सरकार भूमि विकास एवं जल संसाधन विभाग को सिंचाई विभाग में मिलाने की तैयारी कर रही है।
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सरकार का मानना है कि दो अलग-अलग विभाग होने के कारण किसानों को सिंचाई का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

सिंचाई विभाग टेल तक पानी तो पहुंचा देता है लेकिन समय पर गूल न बन पाने के कारण खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। दो विभागों के तालमेल में आ रही दिक्कतों का नुकसान किसानों को हो रहा है।
सिंचाई विभाग पहले नहरों के साथ ही गूलों का निर्माण भी कराता था, लेकिन 1978-79 में यह काम भूमि विकास एवं जल संसाधन विभाग के पास चला गया।

ऐसे में सिंचाई विभाग सिर्फ नहरें बनाने लगा। गूलों के निर्माण का जिम्मा भूमि विकास विभाग के पास आ गया। सिंचाई विभाग नहरें बनाने के बाद भूमि विकास विभाग को वह क्षेत्र चिन्हित कर बताता है जहां गूलों का निर्माण होना होता है।
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बाद में इस्टीमेट बनाकर उसे पास कराया जाता है। गूल बनाने में 50 प्रतिशत पैसा केंद्र सरकार व इतना ही पैसा प्रदेश सरकार देती है।
दरअसल, सिंचाई विभाग नहरों का निर्माण तो कर देता है लेकिन गूलों का निर्माण एक-दो साल बाद भी पूरा नहीं हो पाता। ऐसे में किसानों को सिंचाई का लाभ समय पर नहीं मिल पाता।

साथ ही भूमि विकास विभाग के पास गूलों के मरम्मत की भी कोई व्यवस्था न होने के कारण अधिकतर गूलों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इसी समस्या को देखते हुए सरकार अब सिंचाई विभाग व भूमि विकास एवं जल संसाधन विभाग को एक करने की योजना बना रही है।
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चूंकि दोनों विभाग कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव के पास हैं, ऐसे में दोनों के विलय में ज्यादा दिक्कत भी नहीं आएगी। खुद मंत्री ने भी इस पर अपनी सहमति जता दी है।

खास बात यह कि दोनों विभागों का विलय होने से नहरों के साथ ही गूलों का काम भी शुरू हो सकेगा और किसानों के खेत तक पानी तुरंत पहुंच जाएगा।
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