मामले पर बिन्दकी विधायक करण सिंह पटेल का कहना है,‘मामला पूरी तरह ध्यान में नहीं है। हां! इतना पता है कि सुभाषचंद्र ने जिन अधिकारी-कर्मचारी की जांच कर उन्हें दंडित कराया था, वही लोग अब सुभाष चंद्र की शिकायत कर रहे हैं। मैंने सहकारिता मंत्री को पत्र लिखकर न्यायसंगत कार्यवाई का आग्रह किया है।’
मल्लावां हरदोई विधायक आशीष कुमार सिंह उर्फ आशू का कहना है, ‘सुभाषचंद्र मेरे रिश्तेदार है। उनका विभागीय विवाद है। कुछ लोगों ने उनके खिलाफ शिकायत दी है। एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत कर रहे हैं। उसी संबंध में सहकारिता मंत्री जी को पत्र लिखा है।’
सहकारिता मंत्री ने मुख्यमंत्री को भेजा पत्र
सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा ने भी इस मामले में तत्परता दिखाई। तीनों विधायकों ने उन्हें 26 जून को पत्र दिया और मंत्री ने 27 जून को ही उनके पत्र का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नियमानुसार कार्यवाही का आग्रह किया। मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष सचिव नितीश कुमार ने 27 जून को ही अपर मुख्य सचिव सहकारिता को नियमानुसार कार्यवाही की सिफारिश कर दी। हालांकि जांच रिपोर्ट की तकनीकी जटिलता के चलते आरोपी अधिकारी के खिलाफ दी गई शिकायतों को अभी तक खारिज तो नहीं किया जा सका है, लेकिन अधिकारी पर कार्रवाई का मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में है।
चर्चा है कि सरकार के ठंडे रुख को देखते सहकारी ग्राम विकास बैंक बोर्ड की शनिवार को होने वाली बैठक में यह मामला उठ सकता है। चर्चा का कारण पिछले दिनों बैंक के सभापति शिवपाल सिंह यादव का सुभाष चंद्र से संबंधित पत्रावली का मंगा लेना है।
सूत्रों के अनुसार, सहायक प्रबंधक और उनके मददगार इस कोशिश में जुटे हैं कि किसी तरह से यह मामला शनिवार को यहां होने वाली बोर्ड की बैठक के एजेंडे में ही न आने पाए। देखने वाली बात यह होगी कि बोर्ड की बैठक का इस मामले पर क्या रुख रहता है। सहकारी समिति कर्मचारी सेवानियमावली 1975 के अनुसार प्रबंध समिति (बोर्ड) ही सहकारी संस्थाओं में कर्मचारियों की नियुक्ति प्राधिकारी है। इस नाते प्रबंध समिति को कर्मचारियों पर कार्रवाई का भी अधिकार है।