डेंगू ने अब तक 13 की जान ले ली। अब तक 200 मरीजों को कार्ड टेस्ट में डेंगू पॉजिटिव पाया जा चुका है। मौतें मीडिया में रिपोर्ट हुईं। हंगामे भी हुए।
पर हकीकत क्या है यह अलग बात है। बहरहाल स्वास्थ्य महकमा तो निजी पैथोलॉजी की रिपोर्टों को नहीं मानता। साफ शब्दों में कहें तो ऐसा डेंगू पॉजिटिव मरीज सरकारी अस्पताल में सरकारी लैब की जांच से पहले मर जाए तो सरकारी दस्तावेज में मौत की वजह डेंगू नहीं माना जाता।
मंगलवार को प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अरुण कुमार सिन्हा खबरनवीसों से मुखातिब हुए। मकसद था डेंगू पर स्थिति साफ करने की। पर, सवाल उनसे होते ही, सीएमओ डॉ. एसएनएस यादव सफाई देने में जुट गए।
डॉ. यादव ने दावा किया कि डेंगू से राजधानी में एक भी मौत नहीं हुई। यही नहीं उनका दावा है कि रालोद नेता मुन्ना सिंह चौहान की मौत मल्टी आर्गन फेल्योर से हुई। पर वे यह नहीं बताते कि आखिर मल्टी आर्गन फेल्योर हुआ कैसे।
दरोगा केजी शुक्ला की मौत की वजह वे हेपेटाइटिस बताते हैं। डेंगू को लेकर सच क्या है, यह अलग बात है, पर सीएमओ क्या कहते हैं- पेश है रिपोर्ट...
रालोद नेता मुन्ना सिंह चौहान और दरोगा केजी शुक्ला की मौत कैसे हुई ?
जवाब: मुन्ना सिंह चौहान को बुखार के बाद सिविल में भर्ती कराया गया था। इस दौरान वो वार्ड में गिर गए थे। इसके बाद उन्हें मिडलैंड अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इलाज की रिपोर्ट में हार्ट अटैक की बात सामने निकलकर आई थी। मल्टी आर्गन फेल्योर के बाद एसजीपीजीआई में उनकी मौत हुई थी। दरोगा केजी शुक्ला की मौत हेपेटाइटिस की चपेट में आने के बाद हुई थी। मौत का कारण डेंगू नहीं था।