ओपिनियन पोल में भाजपा की सीटें कम होने के सवाल पर सीएम ने कहा कि ये आंकड़े 6 माह पहले के हैं। इसके बाद पीएम के कार्यक्रम, संगठनात्मक रणनीति, पीएम किसान सम्मान निधि योजना, आयुष्मान भारत और एयर स्ट्राइक ने देश के जज्बे को एक नई जीवंतता दी है। 2019 में मोदी के नेतृत्व में फिर भाजपा सरकार बनेगी।
रमजान को चुनाव से जोड़ना ओछी राजनीति
रमजान को चुनाव से जोड़ने पर भी योगी ने आपत्ति जताई। कहा, ऐसा करके ओछी राजनीति की जा रही है। मुसलमान रमजान मनाएं, उन्हें रमजान मनाने से कौन रोक रहा है। पर्व देश की संवैधानिक परंपरा का हिस्सा हैं। चुनाव प्रचार आप दिन भर कर सकते हैं और चुनाव के दिन मतदान कर सकते हैं। इसमें कहां से पर्व आड़े आते हैं।
सीएम ने कहा कि सपा-बसपा के सहयोग से चलने वाली कांग्रेस नेतृत्व की सरकार के समय में आतंकवादियों को बिरयानी खिलाई जाती थी। लेकिन भाजपा सरकार में आतंकियों को गोली खिलाई जा रही है।
विकास, सुरक्षा, सुशासन के मुद्दे पर लड़ेंगे चुनाव, संगठन तय करेगा किसे टिकट
योगी ने कहा कि विकास, सुरक्षा और सुशासन भाजपा के चुनाव संकल्प-पत्र के हिस्से होंगे। हम विपक्ष के काम और अपने समय के कामों का तुलनात्मक आंकड़ा जनता के सामने रखेंगे। मौजूदा सांसदों के टिकट काटे जाने के सवाल पर योगी ने कहा कि संगठन तय करेगा किसे टिकट दिया जाए।
योगी ने जम्मू-काश्मीर के पूर्व सीएम फारूख अब्दुल्ला के एयर स्ट्राइक को सियासी स्टंट और चुनाव आयोग को सियासी बताने वाले बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। कहा, सेना के शौर्य और पराक्रम पर सवाल उठाने वालों को देश कभी स्वीकार नहीं करेगा। ये लोग कभी सुप्रीम कोर्ट पर उंगली उठाते हैं, कभी चुनाव आयोग पर। जो इनकी संवैधानिक निष्ठा को ही संदेह के घेरे में डालती है।
राहुल को खुद नहीं पता क्या बोल रहे
राफेल पर राहुल गांधी के बयान पर योगी ने कहा कि राहुल उतना ही बोलते हैं जितना उन्हें रटाया जाता है। राहुल से टूजी और डीजी के बारे में पूछना चाहिए। टूजी का मतलब राहुल और सोनियाजी से है और डीजी का मतलब दामादजी है। दामादजी के कारनामे एक-एक कर सामने आ रहे हैं। कांग्रेस में संस्कार खत्म हो गया है। राहुल अमेरिका के राजदूत से मिलते हैं, तो भारत के संगठनों को कठघरे में खड़ा करते हैं। जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को क्लीन चिट देते हैं और आतंकियों के नाम के साथ जी लगाते हैं। देश के संवैधानिक प्रमुख प्रधानमंत्री को गाली देते हैं। ये कांग्रेस के संस्कार हैं, जो पंडित नेहरू से चौथी पीढ़ी राहुल तक आते-आते पतन की पराकाष्ठा पार कर गई है।