मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर हिंदुत्व यानि बहुसंख्यक समाज के मुद्दे पर कांग्रेस समेत विपक्ष को आईना दिखाया। उन्होंने हिंदू एकता, न्यायमूर्ति शेखर यादव और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ विपक्ष के रवैये पर तीखा हमला किया। सीएम ने खुले मंच से न्यायमूर्ति के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि बहुसंख्यक समाज को मजबूत करने की बात करने वालों को अब धमकी दी जा रही है। भारत की विरासत के संवर्धन की बात विपक्ष को इतनी खलती है कि वह महाभियोग ले आते हैं। सीएम ने जनता से सच को दबाने वाले, संविधान का गला घोंटने वाले ऐसे दलों के लोगों की मानसिकता को उजागर करने की अपील की।
सीएम ने शनिवार को मुंबई और रविवार को लखनऊ के एक कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति और न्यायमूर्ति के मुद्दे पर खुले मंच से अपनी बात रखी है। सीएम ने कांग्रेस पर दोहरा चरित्र होने का आरोप लगाते हुए कहा कि जो लोग भारत का ठेका लेकर घूमते हैं और डिस्कवरी ऑफ इंडिया को भारत का सबसे प्राचीन ग्रंथ मानते हैं। वे संविधान के नाम पर पाखंड कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि को लेकर फैसला देने वाले जजों को आज तक धमकी मिल रही है। ऐसे ही विपक्ष राज्यसभा के सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उनकी आवाज को दबाना चाहते हैं। विपक्ष को यह बात खल रही है कि किसान का पुत्र इस पद पर कैसे पहुंच गया। एक न्यायमूर्ति अगर एक नागरिक के रूप में सच्चाई को रखते हैं तो महाभियोग लाकर उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया जाता है।
बहुसंख्यक समाज के मुताबिक संचालित होती है व्यवस्था
सीएम ने कहा कि देश में हर हाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होना चाहिए। दुनिया में बहुसंख्यक समाज जो कहता है, व्यवस्था वैसे संचालित होती है। भारत की मंशा है कि अल्पसंख्यक व बहुसंख्यक का भेद समाप्त हो और सब लोगों पर समान कानून लागू होना चाहिए लेकिन विपक्ष को यह बात अच्छी नहीं लग रही है। ये लोग संविधान का गला घोंटकर जबरन अपने दम पर देश की व्यवस्था चलाना चाहते हैं। दबंगई से सच को दबाने की कोशिश करने वालों को एक्सपोज किए जाने की जरूरत है।
46 वर्ष पहले नरसंहार करने वालों को सजा क्यों नहीं मिली
संसद में संभल का उठाने पर कांग्रेस को घेरते हुए सीएम ने कहा कि इनके ही शासनकाल में 46 वर्ष पहले संभल में जिस मंदिर को बंद कर दिया गया, वह मंदिर फिर से सबके सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि 46 वर्ष पहले जिन दरिंदों ने संभल के अंदर नरसंहार किया था, उन्हें आज तक सजा क्यों नहीं मिली। संभल में जिनकी निर्मम हत्या हुई, उन निर्दोषों का क्या कसूर था। जो भी सच बोलेगा, उसे धमकी दी जाएगी, मुंह बंद कराने का प्रयास करते हैं।