मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में मौसम संबंधी पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक सटीक, त्वरित तथा जनकेंद्रित बनाने के निर्देश दिए हैं। शनिवार को राहत एवं आपदा प्रबंधन विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समय पर दी गई सही सूचना अनेक लोगों का जीवन बचा सकती है। इसलिए मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी तंत्र को केवल तकनीकी व्यवस्था तक सीमित न रखते हुए अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने गांवों और संवेदनशील क्षेत्रों में “लास्ट माइल कनेक्टिविटी” मजबूत करने, आईवीआरएस, पंचायत स्तर के लाउडस्पीकर, स्थानीय एफएम रेडियो, मोबाइल अलर्ट तथा सोशल मीडिया का व्यापक उपयोग करने के निर्देश दिए।
नई डॉप्लर रडार प्रणालियों से होगी सटीक निगरानी
प्रदेश में मौसम पूर्वानुमान को अभेद्य बनाने के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। अलीगढ़, झांसी, लखनऊ, वाराणसी और आजमगढ़ में डॉप्लर वेदर रडार स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि बरेली, देवरिया और प्रयागराज में नए रडार की प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही लखनऊ और प्रयागराज में विंड प्रोफाइलर रडार लगाने की कार्यवाही भी प्रगति पर है। वर्तमान में 450 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और 2000 ऑटोमैटिक रेन गेज पहले से काम कर रहे हैं।
आखरी व्यक्ति तक पहुंचेगी चेतावनी: "लास्ट माइल कनेक्टिविटी"
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि मौसम की चेतावनी केवल तकनीकी कागजों या दफ्तरों तक सीमित न रहे। गांवों और संवेदनशील इलाकों में सूचना तुरंत पहुंचाने के लिए आईवीआरएस, पंचायतों के लाउडस्पीकर, स्थानीय एफएम रेडियो, मोबाइल एसएमएस और सोशल मीडिया का एक साथ बड़ा नेटवर्क इस्तेमाल किया जाएगा।
13 मई के तूफान का सबक और 'नाउकास्ट' अलर्ट
बैठक में 13 मई 2026 को आए भीषण आंधी-तूफान की समीक्षा की गई। इस आपदा की निगरानी आईएमडी 7 दिन पहले से कर रहा था, जिसे बाद में रेड अलर्ट में बदला गया था। लखनऊ, प्रयागराज, कानपुर और भदोही जैसे जिलों में 70 से 80 किमी/घंटा की हवाओं का नाउकास्ट अलर्ट (3 घंटे पहले की सटीक चेतावनी) 'सचेत' प्लेटफॉर्म और मोबाइल एसएमएस के जरिए समय पर भेजा गया था। मुख्यमंत्री ने इस पर जिलाधिकारियों द्वारा की गई ग्राउंड एक्शन की विस्तृत रिपोर्ट ली है।
सुरक्षित व्यवहार के लिए बनेगा एसओपी
केवल चेतावनी देना काफी नहीं है, बल्कि लोगों को आपदा के समय क्या करना है, इसकी जानकारी होनी चाहिए। इसके लिए स्कूलों और पंचायतों में जागरूकता अभियान चलेंगे। साथ ही, तेज हवाओं में गिरने वाले पेड़ों, बिजली के खंभों, होर्डिंग्स और कमजोर ढांचों का स्थानीय स्तर पर आकलन करके एक एसओपी (SOP) तैयार की जाएगी।