मुख्मयंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बस चालकों की हर तीसरे माह फिटनेस जांच अनिवार्य होना चाहिए। विशेष रूप से आंखों की जांच जरूरी है ताकि दृष्टि दोष के कारण दुर्घटनाएं न हों। वह शनिवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में परिवहन विभाग की विभिन्न परियोजनाओं का शुभारंभ कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवहन विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरुक करें। क्योंकि हर साल सड़क हादसों में कोरोना से ज्यादा मौत होती है। इनमें अधिकतर युवा होते हैं, जिससे परिवार उजड़ जाते हैं। सड़क पर चलने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षा परिवहन विभाग की जिम्मेदारी है। यदि किसी यात्री की जान बचती है तो यह विभाग की सकारात्मक छवि बनाता है, लेकिन लापरवाही से जान जाने पर न केवल विभाग की बदनामी होती है, बल्कि आर्थिक क्षति भी होती है।
इसके लिए आईआईटी खड़गपुर जैसी संस्थाओं की तकनीकी मदद, पुलिस और अन्य विभागों का समन्वय, साथ ही स्कूलों में ट्रैफिक नियमों पर शिक्षा जरूरी है। उन्होंने हेलमेट, सीट बेल्ट, नशे में ड्राइविंग, ओवरस्पीडिंग जैसी स्थितियों पर कड़े नियम लागू करने और लोगों को जागरुक करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा विकसित एक ऐप के जरिए अत्यधिक दुर्घटना वाले क्षेत्रों की पहचान की गई, जिससे कई स्थानों पर हादसों की संख्या घटकर महीने में 18 से घटकर 3 तक हो गई।
पर्यावरण प्रदूषण का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढावा देने पर जोर दिया। कहा कि परिवहन और नगर विकास विभाग गांव-गांव कनेक्टिविटी और बेहतर पब्लिक ट्रांसपोर्ट के जरिए न सिर्फ प्रदूषण कम कर सकते हैं, बल्कि 3 लाख तक नए रोजगार भी सृजित कर सकते हैं। इस अवसर पर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक जय देवी, अमरेश कुमार, ओपी श्रीवास्तव, योगेश शुक्ल, विधान परिषद सदस्य रामचंद्र प्रधान, मुकेश शर्मा, परिवहन विभाग के प्रमुख अमित गुप्ता, परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह, परिवहन निगम के एमडी मासूम अली सरवर आदि मौजूद रहे।