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सीएम योगी का निर्देश: प्रदेश की नदियों अवैध खनन पर लगेगी रोक, पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर करेंगे कार्रवाई

Wed, 07 Jan 2026 09:13 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Mining of rivers: यूपी की नदियों में होने वाले अवैध खनन को रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए दूसरे राज्यों की भी मदद ली जाएगी। 
 
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नदी किनारे लगातार हो रहा अवैध बालू खनन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 गंगा समेत अन्य नदियों में अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। अवैध खनन रोकने के लिए अब यूपी समेत सभी पड़ोसी राज्य मिलकर सख्ती करेंगे। इसके लिए सभी राज्यों ने एक संयुक्त निगरानी तंत्र तैयार किया है। इस तंत्र में खनन विभाग और प्रशासन के अधिकारी संयुक्त रूप से प्रर्वतन की कार्यवाही करेंगें, वहीं, वैध ट्रांजिट पास के साथ अंतरराज्यीय परिवहन प्रपत्र (आईएसटीपी) की व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करने का फैसला किया गया है। यूपी के खनन विभाग के अधिकारियों ने मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और झारखंड से भी इसमें सहयोग मांगी है।

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बता दें कि पिछले दिनों समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मुख्य सचिव एसपी गोयल की हुई अलग-अलग बैठकों में अवैध खनन पर सख्ती करने के निर्देश दिए गए थे। इसके तहत भूतत्व और खनिकर्म विभाग ने निगरानी व्यवस्था को दुरुस्त करने के साथ तकनीकी तौर पर और सख्त करने की कार्ययोजना तैयार की है। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्ययोजना को सख्ती से लागू किया जाएगा। साथ ही निगरानी तंत्र को प्रभावी बनाने के लिए इंटीग्रेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म भी तैयार भी किया जाएगा। ताकि हर हर कार्यवाही की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा सके। इससे गंगा बेसिन के साथ ही अन्य नदियों में रेत के अवैध खनन और बिक्री पर रोक लगेगी। यह फैसला पर्यावरणीय संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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रियल टाइम डेटा के आधार पर साझा करेंगे जानकारी

पड़ोसी राज्यों से सीमावर्ती जिलों में सभी लोडिंग पॉइंट्स जैसे खनन पट्टे, खनिज भंडारण स्थल और क्रशरों पर वाहन लोडिंग नियमों का कड़ाई से पालन करने और ओवरलोडिंग संबंधी जानकारी साझा की जाएगी। इसके साथ ही सीमावर्ती राज्यों में स्थापित चेकगेट्स और चेकपोस्ट्स की सूची उपलब्ध कराने और यूपी की ओर निकलने वाले वाहनों का विवरण नियमित रूप से साझा की जाएगी। ये कार्य रियल टाइम डेटा के आधार पर सीमावर्ती जिलों के डीएम और खनन निदेशालय मिल कर करेंगे, जिससे संयुक्त निगरानी और छापेमारी की कार्रवाई आसानी से की जा सकेगी।

सीमावर्ती जिलों के अधिकारी हर महीने करेंगे समीक्षा
बता दें कि इससे पहले भी ड्रोन सर्वे और जीपीएस ट्रैकिंग जैसी तकनीकों के माध्यम से अवैध खनन रोकने को लेकर पहल की जा रही है, लेकिन अंतरराज्यीय सीमाओं वाले जिलों में इसे रोकना अभी भी एक बड़ी चुनौती है। इसलिए तय किया गया है कि सभी राज्यों के सीमावर्ती जिलों के डीएम, पुलिस, परिवहन और खनन विभाग के अधिकारियों की हर महीने समन्वय बैठक होगी। सभी समीक्षा करेंगे और इस फीडबैक के आधार पर सभी राज्यों के अधिकारी टास्क फोर्स के साथ संयुक्त रूप से प्रवर्तन की कार्रवाई करेंगे।
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