मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि बदलते दौर में एक बार फिर -गांव की बेटी सबकी बेटी- के भाव को जगाने की जरूरत है। यह हमारी संस्कृति और संस्कार हैं। गांव से लेकर महानगरों तक इसकी गूंज होनी चाहिए। केंद्र व राज्य सरकार महिला सुरक्षा व सम्मान को सुनिश्चित करने के साथ ही स्वावलंबन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। पर, पूर्ण सफलता महिलाओं के सहयोग व जागरूकता से ही मिल सकेगी।
मुख्यमंत्री रविवार को मिशन शक्ति के दूसरे दिन अपने आवास पर महिला जनप्रतिनिधियों (प्रधान, बीडीसी सदस्य, ब्लॉक प्रमुख, पार्षद नगरीय निकायों की अध्यक्षों), स्वयं सेवी संगठनों और महिला शिक्षकों से वर्चुअल माध्यम कर रहे थे। उन्होंने महिला जनप्रतिनिधियों की प्रगतिशील व सकारात्मक सोच और प्रयासों की तारीफ की। कहा कि प्रदेश की ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में महिला जनप्रतिनिधियों की जागरूकता ने कई क्षेत्रों का कायाकल्प किया है। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए सरकारों का प्रयास तभी सफल होगा, जब स्वयं महिलाएं जागरूक होंगी। कहा, आप जैसे जागरूक महिलाओं के जरिये ही शासन की योजनाएं पात्र व्यक्तियों तक पहुंचती हैं। अगर जनप्रतिनिधि जागरूक न हो तो ये योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर दम तोड़ देती हैं।
सीएम योगी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया है। एक पढ़ी लिखी बेटी, सुरक्षित भी होती है, सम्मानित और स्वावलंबी भी होती है। प्रदेश सरकार ने कोख में बेटियों की हत्या रोकने और बाल विवाह की कुरीति समाप्त करने के लिए मुखबिर योजना शुरू की थी। स्वच्छ भारत अभियान, स्वस्थ बनने का अभियान तो है ही, नारी गरिमा और सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी प्रयास है।
इंसेफेलाइटिस जैसी महामारी की समाप्ति का कारण यही स्वच्छ भारत अभियान है। स्कूल चलो अभियान और स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए ऑपरेशन कायाकल्प के तहत जो प्रयास हुए, उनसे 50 लाख से अधिक बच्चे विद्यालय में बढ़े। सुखद यह है कि इनमें अधिकांश बालिकाएं हैं। इसी तरह मातृ वंदना, सौभाग्य योजनाए, उज्ज्वला योजना, निराश्रित महिला पेंशन योजना ने महिलाओं के जीवन में एक नया सबेरा किया है। पीएम जनधन जैसी योजनाओं ने महिलाओं को वित्तीय समावेशन से जोड़ा है।