मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में उन्हें बेहद खराब स्थिति में बेसिक विद्यालय मिले। 100 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों में अनुदेशकों की सेवाएं समाप्त करने तक के प्रस्ताव आए थे, लेकिन सरकार ने उन्हें अस्वीकार करते हुए ‘स्कूल चलो अभियान’ और ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ की शुरुआत की। अब96 प्रतिशत बेसिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। ड्रॉपआउट दर 17-18 प्रतिशत से घटकर लगभग 3 प्रतिशत रह गई है। अब इसे शून्य तक पहुंचाना है।
शिक्षकों पर कार्रवाई नहीं सम्मान करें
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर बच्चा किसी न किसी प्रतिभा के साथ जन्म लेता है। उसकी प्रतिभा में पहचानने की जरूरत है। बच्चे आत्म अनुशासन, समय पालन, स्वच्छता और संस्कार शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कई बार बच्चे श्रमदान करते हैं। मीडिया में बच्चों के श्रमदान को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यह गलत है। बच्चों में अनुशासन और स्वच्छता की भावना विकसित करने वाले शिक्षकों को दंडित करने के बजाय सम्मानित किया जाना चाहिए।
दो देशों के बीच तनाव से पूरी दुनिया परेशान
मुख्यमंत्री ने वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ता है, उसी प्रकार यदि कोई बच्चा शिक्षा से वंचित रह जाता है तो उसका दुष्परिणाम पूरे समाज और राष्ट्र को भुगतना पड़ता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है और शिक्षा क्षेत्र में हो रहे परिवर्तन भविष्य के भारत की मजबूत नींव तैयार करेंगे।