- ऑक्सीजन टैंकरों की संख्या बढ़ाये जाने के सम्बंध में विशेष प्रयास की जरूरत है। इसमें भारत सरकार से भी सहयोग प्राप्त किया जा सकता है। ऑक्सीजन टैंकर को जीपीएस से जोड़ते हुए इनके संचालन की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाए।
- कोई भी सरकारी अथवा निजी अस्पताल बेड उपलब्ध होने पर कोविड पॉजिटिव मरीज को भर्ती के लिए मना नहीं कर सकता है। यदि सरकारी अस्पताल में बेड उपलब्ध नहीं है, तो संबंधित अस्पताल उसे निजी चिकित्सालय में रेफर करेगा। निजी हॉस्पिटल में मरीज भुगतान के आधार पर उपचार कराने में यदि सक्षम नहीं होगा, तो ऐसी दशा में राज्य सरकार आयुष्मान भारत योजना के तहत अनुमन्य दर पर वहां उसके इलाज का भुगतान करेगी।
- हर दिन की परिस्थितियों पर दृष्टि रखते हुए शासन द्वारा हर दिन नीतिगत प्रयास किए जा रहे हैं। सभी मंडलायुक्त/जिलाधिकारी शासन के सतत संपर्क में रहें। व्यापक जनहित में कोई निर्णय लेने से पूर्व शासन को अवगत जरूर कराएं। आमजन को सुविधा व राहत देने के संबंध में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करें।
- कोविड से लड़ाई जीत चुके बहुत से लोग मरीजों की सेवा के इच्छुक हैं। ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। इनकी जिलेवार सूची तैयार कराएं। इनमें चिकित्सक होंगे, सैन्य कर्मी होंगे, पैरामेडिकल स्टाफ आदि हो सकते हैं।आवश्यकतानुसार अस्पतालों आदि में इनकी सेवाएं ली जाएं।
- रेमडेसिविर जैसी किसी भी जीवनरक्षक दवा का प्रदेश में अभाव नहीं है। हर दिन इसकी आपूर्ति बढ़ रही है। जिलों की मांग को देखते हुए रेमडेसिविर के पर्याप्त वॉयल उपलब्ध कराए जाएं। सरकारी अस्पतालों में यह इंजेक्शन निःशुल्क उपलब्ध है, जरूरत होगी तो निजी अस्पतालों को भी तय दरों पर रेमडेसिविर मुहैया कराई जाए। इसके साथ-साथ इसकी कालाबाजारी पर पुलिस लगातार नजर रखे।
- इंटीग्रेटेड कमांड एन्ड कंट्रोल सेंटर से मरीज को जो अस्पताल आवंटित किया गया है, वहां उसे एडमिट करना अनिवार्य है। जिलाधिकारी यह सुनिश्चित कराएं। अन्यथा की दशा में जिम्मेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री कार्यालय से इसकी मॉनिटरिंग की जाए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में अब तक 97,83,416 लोगों को कोविड टीके की पहली डोज दी जा चुकी है, जबकि 20 लाख से अधिक लोगों को दोनों डोज लग चुकी है। इस तरह टीके की 1,17,83,880 डोज एडमिनिस्टर की जा चुकी है। प्रदेश में वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता है। एक मई से शुरू हो रहे टीकाकरण के आगामी अभियान के संबंध में विधिवत पूरी तैयारी कर ली जाए।
- संक्रमण की तेज दर को देखते हुए वर्तमान ससाधनों में न्यूनतम दोगुने का विस्तार जरूरी है। हर तरह की चुनौती के लिए हमें तैयार रहना होगा। स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग बेड बढ़ोतरी के लिए कार्ययोजना तैयार कर लागू करे। स्वास्थ्य विभाग सभी जिलों में कम से कम दो-दो और सीएचसी को इस कार्य में जोड़ें। इसी तरह चिकित्सा शिक्षा विभाग नए मेडिकल कॉलेजों को डेडिकेटेड कोविड अस्पताल के रूप में तैयार कराए। इन अस्पतालों में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए।
- आमजन को स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह सुलभता से उपलब्ध कराएं। खान-पान, इम्युनिटी बढ़ाने के तरीके, शरीर में ऑक्सीजन बढ़ाने की विधियां आदि के बारे में व्यापक तौर पर जागरूकता प्रसार किया जाए।
- निजी अस्पतालों में कोविड मरीजों के उपचार के लिए तथा कोविड टेस्ट के लिए शासन स्तर पर दरें तय की गई हैं। मंडलायुक्त व जिलाधिकारी यह सुनिश्चित करें कि कहीं भी ओवरबिलिंग न हो। शासन ने कोविड मरीजों के लिए डिस्चार्ज पॉलिसी तय की है, उसे सभी जिलों में समान रूप से प्रभावी बनाया जाए।
- एंटीजन टेस्ट के पॉजिटिव होने के बाद हॉस्पिटल में भर्ती करने के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट के पॉजिटिव होने की कोई आवश्यकता नहीं है। मरीज को जितना जल्दी इलाज मिलेगा, वह उतना ही जल्द स्वस्थ होगा। सभी जिलों में इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू कराया जाए।
- स्वास्थ्य विभाग तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग यह सुनिश्चित कराए कि सभी सरकारी और निजी अस्पताल जिनकी क्षमता 100 से अधिक बेड की है, उनके पास स्वयं का ऑक्सीजन प्लांट हो। यह कार्य प्रदेश में अभियान के रूप में चल रहा है। निजी क्षेत्र को भी प्रोत्साहित करें, सरकार सभी जरूरी सहयोग देगी। ऑक्सीजन प्लांट स्थापना की कार्यवाही तेज की जाए, इसकी हर दिन समीक्षा की जाए। इस कार्य में भारत सरकार का भी सहयोग प्राप्त हो रहा है। प्लान्ट स्थापना में भारत सरकार को अविलंब प्रस्ताव भेज दिया जाए।
- कोविड मरीजों के आवागमन के लिए सभी जिलों में पर्याप्त एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई हैं। यह सभी 24×7 क्रियाशील रहें। एम्बुलेंस का रिस्पॉन्स टाइम कम से कम होना चाहिए। हर जरूरतमंद को एम्बुलेंस मिले। जिलाधिकारी और सीएमओ को इसके लिए जिम्मेदार बनाया जाए।
- पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले सभी कार्मिक मास्क व ग्लव्स का उपयोग करें। संक्रमण की दर में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए, पुलिस फोर्स को संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए विशेष ध्यान दिया जाए। कोरोना से बचाव के संबंध में व्यापक जागरूकता का कार्यक्रम संचालित किया जाए। इसके लिए पब्लिक एड्रेस सिस्टम का प्रभावी उपयोग किया जाए।
- आमजन को बेड की उपलब्धता की समुचित जानकारी उपलब्ध कराई जाए। प्रदेश में ऐसे सभी हॉस्पिटल जहां कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज हो रहा है, प्रत्येक दिन में दो बार अस्पताल में रिक्त बेड का विवरण सार्वजनिक करें। यह विवरण जिले के इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर के पोर्टल पर भी अपलोड कराया जाए। बेड का आवंटन पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए। सभी जिला प्रशासन इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू कराएं।
- विभिन्न राज्यों से प्रदेश आ रहे प्रवासी कामगारों/श्रमिकों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए परिवहन तथा गृह विभाग आपसी समन्वय स्थापित करते हुए कार्य करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि लक्षणविहीन प्रवासी श्रमिकों को न्यूनतम 07 दिन के लिए क्वारन्टीन किया जाए। अस्वस्थ होने की दशा में अच्छी चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाए।
- कोविड की चेन को तोड़ने के लिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग अति महत्वपूर्ण है। कोविड पॉजिटिव व्यक्ति के परिवारीजनों के साथ-साथ उनके संपर्क में आए लोगों का टेस्ट जरुर कराया जाए। आरटीपीसीआर और एंटीजन टेस्ट की क्षमता को दोगुनी की जाए।