मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ के मद्देनजर नदियों के तटबंधों की लगातार पेट्रोलिंग कराने और बाढ़ राहत कार्यों में सुरक्षित नौका का उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। प्रदेश में बाढ़ प्रभावित जिलों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। राहत आयुक्त संजय गोयल ने बताया है कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार बाढ़ राहत का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है।
मुख्यमंत्री ने बाढ़ राहत कार्यों की विस्तार से समीक्षा की है और जिलाधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों को तटबंधों की लगातार पेट्रोलिंग कराने तथा बांधों में कटान की स्थिति की निगरानी कराने को कहा है। उन्हें यह भी ध्यान देने को कहा गया है कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के लिए लगाई गई नौकाएं किसी भी स्थिति में क्षतिग्रस्त न हों और नौवहन के लिए पूरी तरह सुरक्षित हों।
नाव में उसकी क्षमता से अधिक व्यक्ति व सामान लेकर आवागमन न किया जाए। राहत आयुक्त ने बताया कि जिलाधिकारियों को प्रदूषित, जलजनित व वेेक्टर (मक्खी, मच्छर) जनित रोगों की रोकथाम के लिए आवश्यक कार्रवाई करने व इन रोगों के उपचार के लिए आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। पशुओं के आहार के लिए पर्याप्त चारा, भूसा आदि की व्यवस्था भी करने को कहा है।
राहत आयुक्त ने बताया है कि अंबेडकरनगर, अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बलिया, बलरामपुर, बाराबंकी, बस्ती, गोण्डा, गोरखपुर, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी, मऊ, संतकबीर नगर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज तथा सीतापुर के 666 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें से 446 गांव मैरुण्ड तथा जलमग्न हैं। उन्होंने बताया कि शारदा नदी- पलिया कला (लखीमपुर खीरी) में, राप्ती नदी- बर्डघाट (गोरखपुर) में, सरयू (घाघरा) नदी- एल्गिनब्रिज (बाराबंकी) में, सरयू (घाघरा) नदी-अयोध्या में तथा सरयू (घाघरा) नदी-तुर्तीपार (बलिया) में खतरे के जलस्तर से ऊपर बह रही है।