85 वर्षीय मेट्रो मैन डॉ. ई श्रीधरन ने खुलासा किया कि बीते माह उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर लखनऊ और कानपुर मेट्रो प्रोजेक्ट के सलाहकार पद से इस्तीफे की पेशकश की थी। लेकिन योगी ने मेट्रो मैन का इस्तीफा यह कहते हुए नामंजूर कर दिया कि अभी तो उन्हें बहुत काम करने हैं।
इसके साथ ही सीएम आदित्यनाथ ने उन्हें वाराणसी, आगरा, मेरठ और गोरखपुर मेट्रो प्रोजेक्ट की भी जिम्मेदारी सौंप दी। ई श्रीधरन गुरुवार का कोच्चि में आयोजित एक कार्यक्रम में मीडिया से मुखातिब थे, जहां उन्होंने यह जानकारी दी।
कॉमर्शियल रन में देरी पर मुख्य सचिव ने ली अफसरों की क्लास
वहीं, मेट्रो के कॉमर्शियल रन में देरी पर मुख्य सचिव राजीव कुमार ने एलएमआरसी अफसरों की क्लास ली और अधूरे कामों को जल्द से जल्द पूरा करने का आदेश दिया है।
शुक्रवार को मुख्य सचिव ने लखनऊ समेत अन्य शहरों की समीक्षा बैठक बुलाई थी। एलएमआरसी के एमडी कुमार केशव ने उन्हें राजधानी में चल रहे प्रोजेक्ट और प्राथमिकता सेक्शन की प्रगति को अपडेट किया।
सबसे पहले बाकी की एनओसी लें
लखनऊ मेट्रो
- फोटो : amar ujala
एमडी कुमार केशव ने उन्हें बताया कि नौ जून 2017 को आयुक्त मेट्रो रेल संरक्षा (सीएमआरएस) के यहां आवेदन किया जा चुका है। वहां से निरीक्षण के लिए शिड्यूल मिलना बाकी है। इससे पहले ट्रेनों के लिए रेलवे बोर्ड से तकनीकी क्लियरेंस मिल चुका है। इससे ट्रेनों को 80 किमी प्रतिघंटा की स्पीड तक चलाया जा सकता है।
मुख्य सचिव ने कहा कि अगर ऐसा है तो प्राथमिकता पर इस काम को लेकर सीएमआरएस से कॉरीडोर शुरू करने के लिए अनुमति लें। उन्होंने एमडी से सबसे पहले बाकी एनओसी लेने को कहा है। गौरतलब है कि सिंगारनगर स्टेशन को अभी तक फायर एनओसी नहीं मिल सकी है।
इन अड़चनों को करना होगा दूर
लखनऊ मेट्रो के प्राथमिकता सेक्शन पर सिंगारनगर स्टेशन एक बड़ी बाधा बना हुआ है। यहां बायीं तरफ की एंट्री-एग्जिट यात्रियों के लिए नहीं बन सकी है। इसकी वजह से एक ही तरफ से रास्ता स्टेशन के लिए मिल सकेगा। इसके चलते आठ में अके ले सिंगारनगर स्टेशन को ही फायर की एनओसी नहीं मिल पाई है। बायीं तरफ एंट्री-एग्जिट मिलने के लिए जमीन का विवाद सिविल कोर्ट में लंबित है।
क्या करना होगा
अगर जिला प्रशासन इसमें सक्रियता दिखाए तो समस्या दूर हो सकती है। वहीं लखनऊ मेट्रो को भी प्रयास करने होंगे।
निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे
- फोटो : amar ujala
पिछले दिनों ट्रांसपोर्टनगर स्टेशन की रैंप और सर्विस एरिया की फर्श धंस गई। सीढ़ियों के नीचे की मिट्टी बैठने से स्टेशन के स्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा। इसके बाद बारिश में स्टेशनों के टपकने की शिकायतें भी सामने आईं। इससे काम की गुणवत्ता पर सवाल उठे। इसके बाद कार्यदायी संस्था के साथ मिलकर लखनऊ मेट्रो को अपनी कवायद शुरू करनी पड़ी।
क्या करना होगा
लखनऊ मेट्रो पहले ही थर्ड पार्टी जांच कराने के दावे करती रही है। इसको सख्ती से सुनिश्चित करना होगा। वहीं अब तक हुए कामों में गुणवत्ता जांच दोबारा कराने की जरूरत है।
सीएमआरएस से शिड्यूल कब तक
नौ जून को सीएमआरएस को आवेदन लखनऊ मेट्रो ने किया। उसी समय लखनऊ मेट्रो के अधिकारियों ने अगले 15 दिन के अंदर सीएमआरएस की अनुमति मिलने का दावा किया। ऐसा अब तक नहीं हो सका।
क्या करना होगा
सिंगारनगर स्टेशन के लिए फायर एनओसी सुनिश्चित करनी होगी। अग्निशमन विभाग से सशर्त एनओसी के लिए वार्ता की जा सकती है। सीएमआरएस के निरीक्षण के लिए भी शिड्यूल के लिए प्रयास तेज करने होंगे।