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Teacher's Day: शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित कर सीएम योगी बोले- ये पुरस्कार नई जिम्मेदारी है

Mon, 05 Sep 2022 08:18 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस के मौके पर अलग-अलग जिलों के शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित किया।
 
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कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राज्य शिक्षक पुरस्कार सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि एक नई जिम्मेदारी है।  पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों ने जितना किया है अब उन्हें उससे आगे बढ़ना है और दूसरों के सामने एक उदाहरण पेश करना है। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को आगे बढ़ाने का प्रयास करें। वे सोमवार को शिक्षक दिवस पर लोकभवन में हुए शिक्षकों के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।

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उन्होंने पुरस्कृत शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि वे इस नई जिम्मेदारी को संभालकर रखें। कोई ऐसा कार्य न करें जिससे कल उनकी कार्यपद्धति पर कोई प्रश्नचिह्न खड़ा हो। उन्होंने अब तक जो किया है, उससे उनकी स्वयं की प्रतिस्पर्धा होगी। अब उनको इससे आगे बढ़कर काम करना है और कुछ नया करके दिखाना है और समाज को कुछ नया देना है। एक शिक्षक सिर्फ सरकारी कर्मचारी नहीं होता। वह राष्ट्र निर्माता भी होता है। हर शिक्षक कुछ नया कर सकता है। शिक्षा सिर्फ सैद्धांतिक न हो, बल्कि छात्रों को व्यावहारिक व तकनीकी रूप से सक्षम भी बनाए।

उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में सरकार की ओर से किए गए उल्लेखनीय बदलावों की भी जानकारी दी। कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा के 10 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार व विभिन्न बोर्डों के मेधावियों के विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को सीएम ने सम्मानित किया। समारोह को व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री कपिल देव अग्रवाल, माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने भी संबोधित किया।
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स्कूल में बच्चों का झाड़ू लगाना गलत नहीं
सीएम ने कहा कि स्कूल में बच्चों का झाड़ू लगाना गलत नहीं है। शिक्षक को भी बच्चों के सामने झाड़ू लगाकर उस प्रक्रिया से जुड़ना चाहिए। यह स्वाबलंबन का लक्षण है। इसमें नकारात्मकता नहीं होनी चाहिए। काम कोई छोटा, बड़ा नहीं होता। जो विद्यालय हमें हर सुविधा दे रहा है, आगे बढ़ने का मंच दे रहा है, वह मंदिर जैसा होना चाहिए। उन्होंने पुरातन छात्रों को विद्यालय से जोड़ने पर जोर दिया। कहा, इससे विद्यालयों का बिना सरकारी सहायता के भी कायाकल्प हो सकता है।

 




बेसिक शिक्षा के इन शिक्षकों को सीएम ने राज्य पुरस्कार से किया सम्मानित
- बाराबंकी : उच्च प्राथमिक विद्यालय कोपवा सिद्धौर के सहायक अध्यापक दिनेश कुमार वर्मा।
- मिर्जापुर : प्राथमिक विद्यालय भगेसर, पहाड़ी के प्रधानाध्यापक के रविकांत द्विवेदी।
- भदोही : उच्च प्राथमिक विद्यालय कोइलरा औराई की सहायक अध्यापक ज्योति कुमार।
- अयोध्या : प्राथमिक विद्यालय रुरुखास के प्रधानाध्यापक मनीष देव।
- आजमगढ़ : प्राथमिक विद्यालय जिवली, ठेकमा के प्रधानाध्यापक सदाशिव तिवारी।
- हापुड़ : संविलियन विद्यालय राजपुर सिंभावली की सहायक अध्यापक अरुणा कुमारी राजपूत।
- प्रतापगढ़ : उच्च प्राथमिक विद्यालय मरुआन, बाबा बेलखरनाथ धाम की सहायक अध्यापक रश्मि मिश्रा।
- आगरा : प्राथमिक विद्यालय नगला पैमा बरौली अहीर के सहायक अध्यापक श्रीकांत कुलश्रेष्ठ।
- बलरामपुर : उच्च प्राथमिक विद्यालय सहजौरा (कंपोजिट), रेहरा बाजार के सहायक अध्यापक श्रीराम हरिजन।
- गोंडा : कंपोजिट विद्यालय बाबा मठिया वजीरगंज के सहायक अध्यापक सुनील कुमार।


टॉपर्स के माध्यमिक विद्यालयों के ये प्रिंसिपल सम्मानित
- आभा अनंत : प्रधानाचार्य सीएमएस गोमतीनगर लखनऊ
- रमेश चंद वर्मा : प्रधानाचार्य अनुभव इंका. मुरलीपुर रार, कानपुर।
- विक्रम सिंह : प्रधानाचार्य जय मां एसजीएमआईसी राधानगर, फतेहपुर।
- नीरज भारद्वाज : प्रधानाचार्य श्रीलक्ष्मण दास यजुर्वेद सं.मा.वि. बुलंदशहर।
- सरिता गुप्ता : प्रधानाचार्य गंगोत्री देवी उ.मा.सं.बालिका वि.गौरी बलिया।
-  आशु त्यागी : प्रधानाचार्य स्काटिश इंटर कॉलेज, खीरी, कर्मू, शामली।
- रेनू सिंह : प्रधानाचार्य एमिटी इंटरनेशनल स्कूल, सेक्टर-44, नोएडा।
- वनिता मेहरोत्रा : प्रधानाचार्य शेलिंग हाउस स्कूल, कानपुर।


समारोह में यह भी रहा खास
- समारोह में माध्यमिक शिक्षा के विभिन्न पोर्टल की शुरुआत भी की गई। इनमें पहुंच, पंख, प्रज्ञान, परख और पहचान पोर्टल शामिल हैं।
- 39 नवीन हाईस्कूल व 14 नवीन इंटर कॉलेज भवनों के निर्माण का शिलान्यास।
- कौशल विकास मिशन व माध्यमिक शिक्षा विभाग के बीच विभिन्न 150 विद्यालयों में कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र खोले जाने का अनुबंध।
- कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं व दिव्यांग श्रेणी के कुल 1.02 लाख छात्र-छात्राओं को स्टाइपेंड व एस्कार्ट अलाउंस डीबीटी से खातों में भेजा गया।

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मुख्यमंत्री से राज्य पुरस्कार प्राप्त दस शिक्षकों ने की बातचीत

शिक्षक पुरस्कार की रैकिंग में 105 अंकों के साथ प्रदेश में प्रथम हासिल किया। इनके विद्यालय के बच्चे तीन बार राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं में सफल हुए। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में विद्यालय के बच्चों ने शोध पत्र प्रस्तुत किया। राज्य स्तर पर इंस्पायर अवार्ड में लगातार बच्चे चयनित हुए हैं। विज्ञान संगोष्ठी में बच्चों ने टॉप किया।
दिनेश कुमार वर्मा, सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय कोपवा सिद्धौर, बाराबंकी।

प्रदेश की रैकिंग में दूसरा स्थान हासिल किया। विद्यालय में उत्कृष्ट कार्य करने, नामांकन बढ़ाने का श्रेय है। गुणवत्ता युक्त शिक्षा व बच्चों की विद्यालय में उपस्थिति रहती है। राज्य स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता, मेरी उड़ान प्रतियोगिता, आओ गढ़ें कहानी, आपरेशन कायाकल्प के मानक पूरे करने का श्रेय है। आईसीसी विधि द्वारा स्मार्ट क्लास में पढ़ाई कराने, लाइब्रेरी स्थापना के लिए पुरस्कार दिया गया है।
रविकांत द्विवेदी, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय भगेसर, पहाड़ी, मिर्जापुर।

रैकिंग में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। विद्यालय में पढ़ाई के लिए अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन कराया। साथ ही राष्ट्रीय आय छात्रवृत्ति परीक्षा में प्रति वर्ष कई बच्चे सफल हो रहे हैं। इस बार दस बच्चे चयनित हुए हैं। ऑनलाइन पत्रिकाओं का संपादन कार्य करती हैं और डिजिटल पढ़ाई की सामग्री तैयार कराने में योगदान देती हैं।
ज्योति कुमारी, सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय कोइलरा औराई, भदोही।

रैकिंग में चौथा स्थान हासिल किया। कई राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। दिव्यांग बच्चों  व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के शोध पत्र महत्वपूर्ण हैं। विद्यालय के विकास के लिए ग्रामीणों के साथ मिलकर काम किया। राज्य स्तरीय पर्यावरण मित्र, आईसीटी पुरस्कार मिल चुका है। मेरा विद्यालय, मेरी पहचान के तहत पुरस्कार पा चुके हैं। राज्य स्तरीय पटकथा लेखन के लिए भी पुरस्कृत हुए।
मनीष देव, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय रुरुखास, अयोध्या।

पांचवीं रैंक हासिल की है। विद्यालय में बच्चों का नामांकन 240 था, जिसे बढ़ाकर 440 कराया। कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई पर विशेष प्रयास किए। समाज के सहयोग से फर्नीचर, कंप्यूटर, स्मार्ट टीवी विद्यालय में जुटाए। पठन-पाठन दुरुस्त किया। नवाचार के तहत मैथमेटिकल गार्डन विद्यालय में बनाया है, जिसमें 21 गणित की क्रियाएं बच्चों को कराते हैं। लैंगुएज कॉरीडोर में गेम्स के माध्यम से तीनों भाषाओं का ज्ञान देते हैं। पठन-पाठन क्षमता बढ़ाने के लिए पुस्तकों का बागीचा बनाया है।
सदाशिव तिवारी, प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय जिवली, ठेकमा, आजमगढ़।

छठवीं रैंक मिली है। विद्यालय में नवाचार करने यानी कुछ नया करने में आगे रहती हैं। विद्यालय में बच्चों का नामांकन बढ़ाने व उनकी उन्नति के प्रयास करने का श्रेय है। इनका विद्यालय जिले के सर्वश्रेष्ठ पांच विद्यालयों में एक है। कायाकल्प के तहत सभी मानक विद्यालय में पूरे हैं। कई लेख राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय स्तर की पुस्तकों में प्रकाशित हो चुके हैं। इससे जापान, आस्ट्रेलिया व यूएसए में बेसिक शिक्षा विभाग को पहचान मिली। एक पुस्तक का संपादन किया, जिसमें विभाग की 32 शिक्षिकाएं शामिल हैं।
अरुणा कुमारी राजपूत, सहायक अध्यापक, संविलियन विद्यालय राजपुर सिंभावली, हापुड़।

अवार्ड मानकों में सातवां स्थान हासिल किया। इनका विद्यालय बाल वैज्ञानिकों की नर्सरी कहलाता है। बच्चे इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल, इंडिया साइंस फेस्टिवल व गिनीज बुक वर्ल्ड रिकार्ड में नाम दर्ज करा चुके हैं।
रश्मि मिश्रा, सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय मरुआन, बाबा बेलखरनाथ धाम, प्रतापगढ़।

अवार्ड रैंक में आठवां स्थान हासिल किया। विद्यालय में जब इनकी नियुक्ति हुई तो उस समय विद्यालय भवन नहीं बना था। सिर्फ नींव भरी हुई थी। टीन शेड के नीचे बच्चों को पढ़ाते थे। आज उत्कृष्ट विद्यालय भवन तैयार हो गया है। स्मार्ट क्लास व डिजिटल पढ़ाई की सुविधा है। डिजिटल भारत के निर्माण के लिए अन्य स्कूलों में भी स्मार्ट क्लास शुरू करने की इच्छा रखते हैं।
श्रीकांत कुलश्रेष्ठ, सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय नगला पैमा बरौली अहीर, आगरा।

नौवीं रैंक हासिल की है। विद्यालय में अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन कराया। बच्चों की विद्यालय में उपस्थिति अच्छी रहती है। शैक्षिक गुणवत्ता के लिए विभिन्न प्रकार के नवाचार किए। राष्ट्रीय आय, विद्या ज्ञान, श्रेष्ठा जैसी प्रतियोगिताओं में बच्चे चयनित हो रहे हैं। राष्ट्रीय विज्ञान अविष्कार अभियान में हर साल बच्चे जिले में आते रहे हैं। विज्ञान के प्रयोग से बच्चों का शिक्षण करते हैं।
श्रीराम हरिजन, सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय सहजौरा (कंपोजिट), रेहरा बाजार, बलरामपुर।

दसवीं रैंक हासिल की। विद्यालय में जब ज्वॉइन किया तो छात्र संख्या सात थी। वहीं बगल के कान्वेंट विद्यालय में अच्छी खासी संख्या थी। अभिभावकों के सहयोग से विद्यालय का माहौल सुधारने का प्रयास किया। स्मार्ट क्लास, पुस्तकालय आदि की व्यवस्था कराई। पठन-पाठन दुरुस्त होने से छात्र संख्या 350 हो गई। बगल में चल रहा कान्वेंट विद्यालय बंद हो गया। इंस्पायर अवार्ड व मेरी उड़ान प्रतियोगिता में बच्चे चयनित हो चुके हैं।
सुनील कुमार, सहायक अध्यापक, कंपोजिट विद्यालय बाबा मठिया वजीरगंज, गोंडा।
 
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