मुख्यमंत्री अखिलेश यादव राजधानी में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनाए जाने संबंधी मौजूदा प्रस्ताव से नाखुश हैं। इसके पीछे निजी विकासकर्ता को 67 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव बताया जा रहा है।
विभागीय जानकारों की मानें तो मुख्यमंत्री ने मौजूदा स्वरूप पर आपत्ति जताते हुए नए सिरे से प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। नए प्रस्ताव में निजी विकासकर्ता कम दी जाएगी।
राजधानी लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम का निर्माण पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर किया जाना है।
इसके लिए इसके लिए सुल्तानपुर रोड के पास शहीद पाथ पर स्थित ग्राम अरदौनामऊ के पास 128.36 एकड़ और मस्तेमऊ में 20 एकड़ जमीन की व्यवस्था की जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण 70 एकड़ जमीन पर किए जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसके अलावा प्राइवेट पार्टनर को 67 एकड़ जमीन रियल एस्टेट विकसित करने के लिए दिए जाने का प्रस्ताव था।
इसमें 25 प्रतिशत जमीन पर आवासीय सुविधा और 75 प्रतिशत जमीन पर व्यावसायिक, वाणिज्यिक और होटल व अन्य सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव था।
सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री के समक्ष जब इसका प्रस्तुतीकरण किया गया तो उन्होंने प्राइवेट पार्टनर को 67 एकड़ जमीन देने पर आपत्ति जता दी।
आवास विभाग के अधिकारियों से कहा कि इसके लिए संशोधित प्रस्ताव तैयार किया जाए। इसे चक गंजरिया फार्म से जोड़ा जाए ताकि, आईटी सिटी के साथ इसका भी विकास हो सके।
सूत्रों का तो यह भी कहना है कि स्टेडियम का प्रस्ताव बनाने में लगे लखनऊ विकास प्राधिकरण के टाउन प्लानर रवि जैन को इसके चलते ही गोरखपुर विकास प्राधिकरण स्थानांतरित किया गया है।
इसके अलावा सहायक अभियंता रोहित खन्ना के साथ अन्य कई अधिकारियों के हटाए जाने की संभावना जताई जा रही है।