अलिफ लैला, मल्लिका, नायाब, हुस्नआरा, नाजुक बदन, बेनजीर, हिमायत, निसार पसन्द-माफ करें ये किसी नवाब की बेगमों के नाम नहीं हैं। ये खास नाम आम के हैं। फलों का राजा लेकिन कई नाम रानियों वाले। नाम भी इतने अनूठे और अलग कि सुनते ही चेहरे पर मुस्कान थिरक जाए।
अगर आम महोत्सव जैसे आयोजन न हों तो पता ही न चले कि आम के इतनी प्रजातियां और नाम हो सकते हैं। यही कारण है कि आम को पूरी तरह लाल देखकर, उनके बड़े-छोटे आकार या उनके चिकने और खुरदरे सतहों को देखकर लोग जितने आश्चर्य में पड़ रहे थे उससे कम आश्चर्य उन्हें उनके नामों पर नहीं हो रहा था।
लोग आम के नामों को पढ़ते, मुस्कुराते और फिर एक-दूसरे से उसकी चर्चा करते। आम के अलग-अलग नामों ने भी महोत्सव में लोगों को खूब आकर्षित किया। प्रदर्शनी में आमों के कई अनूठे नाम भी देखने को मिले। ऐसे नामों में काला पहाड़, बेगम पसंद, गिलास, लतीफ उस समर, बिहारी वाला, आमीन इब्राहिमपुर, लालमणि, मोहनभोग, रत्ना, हरदिल अजीज, काउसजी पटेल,
कोहिनूर, किचनेर, स्वर्ण रेखा, दिलशाद, राजावाला, किशनभोग, बंगलौरा शामिल हैं। हालांकि कई नाम एच और उसके आगे अलग-अलग संख्याओं के भी रहे।
महोत्सव में विभिन्न बागबानों द्वारा प्रदर्शित की गई प्रजातियों में चौसा, फजरी, सफेदा, लंगड़ा जैसे आम के चिरपरिचित नामों के बीच गाबिल पसंद, शहर कुप्पी, तैमूरिया, बेनजीर संडीला, जरदालू, अरुणिका, अरुणिमा, श्रेष्ठा, पीतांबरा, लालिमा, हाथी झूल, गुलाब खास जैसे नाम भी लोगों का ध्यान आकृष्ट कर रहे थे।