मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वैज्ञानिकों व विद्वानों को सम्मानित किया
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश में इन दिनों दो दलों के बीच इस बात का कॉम्पटीशन चल रहा है कि कौन कितना बुरा बोल सकता है। अब तो स्थिति ये है कि जो बोलो सोच-समझकर बोलो, पता नहीं कब प्रदर्शन शुरू हो जाएं।
मुख्यमंत्री ने मायावती का नाम लिए बगैर चुटकी लेते हुए कहा कि भाजपा वालों को तो कम से कम यह सोचना चाहिए था कि जब हम बुआ बोलते हैं तो उन्हें भी बुआ बोल देना चाहिए था।
अब भाजपा वालों को जल्दी मौका मिलने वाला है। अगले महीने रक्षाबंधन आने वाला है। राखी बांधकर माफी मांग लो, सब खत्म हो जाएगा। रक्षाबंधन तो पहले भी आप दोनों ने मिलकर मनाया था।
मुख्यमंत्री शनिवार को अपने सरकारी आवास पांच पर शिक्षकों, वैज्ञानिकों व संस्कृत विद्वानों के सम्मान समारोह में बोल रहे थे।
'अदब के लिए जाने-जाने वाले शहर में ऐसी भाषा का इस्तेमाल गलत'
मुख्यमंत्री अखिलेश ने बसपा पर निशाना साधते हुए कहा कि दूसरी पार्टी के लोगों ने भी क्या मंच से कमाल कर दिया। किस तरह की भाषा इस्तेमाल की गई। जो शहर अदब व सम्मान के लिए जाना जाता है, वहां इस तरह की भद्दी भाषा का इस्तेमाल किया गया।
अखिलेश बोले, अपशब्द को सही नहीं ठहराया जा सकता। किसी भी महिला व बच्चियों के प्रति ऐसी भाषा का उपयोग बिल्कुल नहीं होना चाहिए, लेकिन बयान का दूसरा हिस्सा बिल्कुल सच है।
सबने यही कहा कि बहुजन समाज पार्टी में टिकट तो पैसे से ही मिलते हैं। अगर यह बात सच नहीं है तो बसपा से जो भी निकलकर आ रहे हैं, वे यही आरोप क्यों लगा रहे हैं।
चुनाव पर अखिलेश ने कहा कि मैं तो यही चाहता हूं कि दोनों पार्टियां बिल्कुल सरेंडर न करें जितनी ताकत व हिम्मत हो खूब लड़ें।
हमारी पार्टी के लोग गलती करते तो आप गुंडा कहते
मायावती के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने के मसले पर पत्रकारों के सवाल पर अखिलेश ने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है। यदि किसी ने तहरीर दी तो सरकार की जिम्मेदारी है कि उसकी एफआईआर दर्ज हो।
अफसर जांच कर रहे हैं। जिन्होंने गलती की है, उन पर कार्रवाई की जाएगी। लखनऊ के मंच पर जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, यदि यही काम समाजवादी पार्टी के लोग करते तो उन्हें गुंडा कहा जाता।
कांग्रेस हिसाब कम मांग रही है, उन्हें देना ज्यादा है...
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के ‘27 साल यूपी बेहाल’ प्रचार अभियान के सवाल पर कहा कि कांग्रेस कम हिसाब मांग रही है, उन्हें हिसाब ज्यादा देना है। आजादी के बाद यदि सही दिशा में देश चलाया गया होता तो यहां के नौजवानों को नौकरियां मिल रही होतीं। हर स्तर पर देश की तुलना दूसरे देशों से होती।
एम्स के लिए न कांग्रेस ने बुलाया, न भाजपा ने
मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा सरकार ने दो-दो एम्स के लिए मुफ्त में जमीन दी, लेकिन न तो कांग्रेस ने रायबरेली में एम्स के शिलान्यास में बुलाया और अब हमारे लोग कह रहे हैं कि गोरखपुर एम्स के शिलापट्ट में हमारा नाम तक नहीं लिखा गया।
हमारे हिसाब से तो गन्ना किसानों का 3000 करोड़ बकाया
अखिलेश ने कहा कि कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरखपुर में कहा कि गन्ना किसानों का अब 175 करोड़ रुपये बचा है। पता नहीं कैसे हिसाब-किताब लगाते हैं। हम कल से लेकर आज तक अफसरों से मिलवा रहे हैं, हिसाब-किताब ही नहीं मिल रहा है।
हमारे हिसाब से गन्ना किसानों का अभी 3000 करोड़ रुपये बकाया है। आरोग्य योजना के तहत 7000 करोड़ रुपये देने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी यह पैसा मिला ही नहीं है।