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अखिलेश की गुजारिश, पहले की तरह दो पैसा!

Sat, 28 Mar 2015 01:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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14वें वित्त आयोग में राज्यों को मिलने वाला केंद्रांश भले ही 10 फीसदी बढ़ा दिया गया है, लेकिन इसकी कई सिफारिशों के कारण प्रदेश को केंद्र सरकार से मिलने वाले धन में कमी आएगी।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि 14वें वित्त आयोग द्वारा लागू फॉर्मूले में प्रदेश का अंश कम किए जाने से राज्य सरकार को वर्ष 2015-16 में लगभग 9057.73 करोड़ रुपये कम मिलेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री से पहले की भांति केंद्रांश देने का आग्रह किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार राज्यों को मिलने वाली केंद्रीय राशि को 32 से बढ़ाकर 42 प्रतिशत किए जाने से आभास हो रहा है कि राज्यों को अधिक पैसा मिलेगा, लेकिन सच यह है कि वास्तविक राशि कम मिलेगी। सीएम ने इस विसंगति को दूर किए जाने का अनुरोध किया है।
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उन्होंने आग्रह किया है कि केंद्र सरकार की ओर से प्रायोजित योजनाओं में केंद्रांश का प्रतिशत पूर्व की भांति ही रखा जाए ताकि किसानों, मजदूरों समेत हर वर्ग को लाभान्वित करने वाली योजनाओं के क्रियान्वयन में धन की कमी से कठिनाई न हो।

उन्होंने कहा है कि 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार विभाज्य पूल में अंश मात्र 17.959 प्रतिशत निर्धारित किया गया है, जो 12वें एवं 13वें वित्त आयोग की अवधि में क्रमश: 19.264 एवं 19.677 प्रतिशत था।

जनसंख्या व पिछड़ेपन का नहीं रखा ध्यान

मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्य सरकार ने प्रदेश की जनसंख्या एवं पिछड़ेपन का ध्यान रखते हुए राशि देने करने की मांग 14वें वित्त आयोग के समक्ष मजबूती से उठाई थी, लेकिन नए फॉर्मूले में इसे शामिल नहीं किया गया।

नए फॉर्मूले में वन क्षेत्र को 7.5 प्रतिशत वेटेज दिया गया है। प्रदेश में अधिक वन क्षेत्र न होने के कारण राज्य का अंश कम हुआ है।

पिछले फॉर्मूले से मिलता ज्यादा धन
अखिलेश यादव ने कहा है कि यदि 13वें वित्त आयोग के फॉर्मूले के अनुसार राशि आवंटित की जाती तो राज्य सरकार को केंद्रीय बजट 2015-16 में केंद्रांश 94,313.46 करोड़ रुपये के बजाय 1,03,371.19 करोड़ रुपये प्राप्त होते। यानी 14वें वित्त आयोग के फॉर्मूले में प्रदेश को लगभग 9057.73 करोड़ रुपये कम मिलेंगे।
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खत्म कर दिये विशिष्ट सहायता अनुदान

सीएम ने कहा है कि 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद राज्य को 13वें वित्त आयोग से मिलने वाले सहायता अनुदान एवं विशिष्ट सहायता अनुदान खत्म कर दिए गए हैं।

इनमें प्राथमिक शिक्षा, वन सबंधी अनुदान, सड़कों, पुलों तथा नहरों की मरम्मत, न्याय, पुलिस एवं बुंदेलखंड तथा पूर्वांचल  संबंधी योजनाएं शामिल थीं। कुछ केंद्र प्रायोजित योजनाएं डि-लिंक कर दी गई हैं। कुछ योजनाओं में केंद्रांश भी कम कर दिया गया है। इससे राज्यों का व्यय भार बढ़ेगा।

प्रदेश के विकास पर पड़ेगा असर
मुख्यमंत्री ने कहा है प्रदेश को प्राप्त होने वाले प्रतिशत आवंटन में कमी के साथ-साथ केंद्रीय योजनाओं के व्यय-भार में राज्य की भागीदारी में वृद्धि होने के कारण प्रदेश के संसाधन और भी संकुचित हो जाएंगे।

इसका प्रत्यक्ष प्रभाव प्रदेश के विकास पर पड़ेगा। राज्य सरकार ने अपने सीमित संसाधनों से जनहित में कई कल्याणकारी योजनाएं चला रखी हैं। बदले हुए परिदृश्य में उन्हें जारी रखना मुश्किल हो जाएगा।
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