पिछले दिनों एक विभाग का कार्यक्रम था। कार्यक्रम सूबे के मुखिया का था। इसलिए विभाग के वजीर के साथ ही नायब वजीरों ने भी खूब तैयारी की थी।
सोचा था कि मुखिया के सामने उनकी तारीफों के पुल बांधेंगे, लेकिन इन तैयारियों पर पानी तब फिर गया जब मुखिया कार्यक्रम में दो घंटे से भी अधिक विलंब से पहुंचे।
इसके बाद तय कार्यक्रम में छंटनी करके उसे छोटा कर दिया गया। लिहाजा विभाग के वजीर को तो बोलने का मौका मिल गया लेकिन बाकी बेचारे इंतजार ही करते रह गए।
मुखिया ने कार्यक्रम के उद्बोधन में वजीर की तारीफ कर दी लेकिन नायब पर ध्यान नहीं दिया।
एक तो बोलने का मौका नहीं मिला और मुखिया से भी कोई खास तवज्जो न मिल पाने से नायब निराश हैं।