मुख्यमंत्री बनने के बाद पहले सार्वजनिक कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने कहा- सूर्य नमस्कार और नमाज की क्रियाएं मिलती-जुलती हैं लेकिन कभी इनमें बेहतर समन्वय और जोड़ने का काम नहीं किया गया।
वर्ष 2014 से पहले देश में इस तरह के आयोजन सांप्रदायिक माने जाते थे। हमें तय करना होगा कि वास्तव में सांप्रदायिक कौन है? योग किसी जाति, धर्म, लिंग का मोहताज नहीं है।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में उत्तर प्रदेश योग महोत्सव में मुख्यमंत्री ने कहा- 2014 से पहले अगर देश के किसी जिले में योग महोत्सव कराने की बात कही होती तो इसे सांप्रदायिक बता दिया गया होता।
हमें यह तय करना होगा कि आखिर सांप्रदायिक सच में कौन है? सूर्य नमस्कार और नमाज की क्रियाओं को देखें तो दोनों में काफी हद तक समानता दिखेगी। अब मुस्लिम भाई समझ लें कि सही क्या है? जो लोग जाति धर्म और मजहब में हमें बांट रहे हैं वो लोग कैसे योग की बात कर सकते हैं?