कवि सम्मेलन में कविता पढ्ते कवि दुर्गेश पाण्डेय दुर्लभ
लखनऊ। सरदार पटेल सामाजिक एवं साहित्यिक संगठन की ओर से हिंदी संस्थान में बुधवार को कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान रचनाकारों ने अपनी कविताओं से ओज, हास्य और शृंगार के रसों से श्रोताओं को सराबोर कर दिया। संयोजन पातीराम गंगवार ने किया।
अयोध्या के वरिष्ठ कवि जमुना प्रसाद उपाध्याय ने सुनाया - हजारों योजनाओं के यहां बादल उमड़ते हैं, सबब क्या है कि इन फसलों का पीलापन नहीं जाता। बाराबंकी के कवि शिवकिशोर ‘खंजन’ ने पढ़ा - मिले यदि प्रेम का प्याला जहर भी जाम होता है, हृदय जो प्रेम में डूबा वो प्रभु का धाम होता है। संस्था की सचिव कवयित्री हेमा पांडेय ने सुनाया - प्रेम पर जो भावना का हुआ कभी वज्रपात, स्वयं प्रेम हेतु आप ढाल बनीं राधिका। हास्य कवि प्रदीप महाजन ने सुनाया - बच्चों को मिले शुद्ध दूध इसलिए मित्रों, अध्यापकों को भैंस भी अब पालनी होगी। कवि गोबर गणेश ने सुनाया - देहो हमका का देहो, जो कुछ तुम देहो, अपने बिटिया दामाद का देहो। उनकी कविता पर खूब ठहाके लगे। सुनील बाजपेई, दुर्गेश पांडेय ‘दुर्लभ’ ने भी काव्यपाठ किया।