निरीक्षण करते हुए निदेशक डॉ. राजीव और साथ में कुलपति
लखनऊ। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में दिव्यांगों के उपयोग में आने वाले मेडिकल डिवाइस को बनाने व नई दवाओं के परीक्षण के लिए क्लीनिकल ट्रायल केंद्र स्थापित होगा। इससे यहां पढ़ रहे दिव्यांग छात्र-छात्राओं को भी फायदा होगा। विश्वविद्यालय परिसर में शुक्रवार को इंडियन फॉर्माकोपिया कमीशन के साइंटिफिक निदेशक व सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन के ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने दौरा किया।
डॉ. रघुवंशी ने कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केंद्र के लैब, स्टोर एवं बाधारहित विशिष्ट स्टेडियम का भी निरीक्षण किया और दिव्यांगों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। कुलपति ने विश्वविद्यालय की प्रगति के बारे में बताया। डॉ. रघुवंशी ने शोध व विकास के क्षेत्र में विश्वविद्यालय को सहयोग देने की बात कही। कहा कि दिव्यांगों के मेडिकल डिवाइस को बनाने व इस क्षेत्र में क्लीनिकल ट्रायल के लिए विश्वविद्यालय के केंद्र की अहम भूमिका होगी। इससे विश्वविद्यालय की भी नई पहचान होगी।
इन संकायों में कौशल को मिलेगा बढ़ावा
कुलपति ने बताया कि सेंटर की स्थापना से फाॅर्मेसी, प्रोस्थेटिक्स और ऑर्थोटिक्स संकायों के कौशल व डिजाइन और उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा।
विश्वविद्यालय में दिव्यांगों की जरूरतों के अनुकूल लघु अवधि के तकनीकी कौशल संवर्धन कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित होंगी। दिव्यांगों के अनुकूल माहौल बनाने के लिए इंटर्नशिप का भी मौका मिलेगा।
- डॉ. यशवंत कुमार विरोदाई, प्रवक्ता पुनर्वास विश्वविद्यालय