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टिकट बंटवारे में नहीं ली अखिलेश की राय, सपा में बढ़ा घमासान

Tue, 04 Oct 2016 02:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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अखिलेश यादव ‌व शिवपाल यादव - फोटो : amar ujala
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समाजवादी पार्टी में शीर्ष स्तर पर चल रहा घमासान सोमवार को प्रत्याशियों की घोषणा के बाद और बढ़ गया। टिकट वितरण के अधिकार की मांग कर रहे सीएम अखिलेश यादव से सलाह-मशविरे के बिना उम्मीदवारों की सूची जारी किए जाने को उनके लिए झटका माना जा रहा है।
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इतना ही नहीं, उनके नजदीकियों पर गाज भी गिर गई। परिवार के झगड़े को निपटाने के लिए सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने रामगोपाल और शिवपाल यादव के साथ बातचीत की। इसमें प्रत्याशियों की सूची जारी होने और युवा नेताओं के खिलाफ कार्रवाई समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई है।

सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने सोमवार सवेरे साढ़े दस बजे ही 26 प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी। इनमें नौ नए उम्मीदवार है और 17 के टिकट बदले गए हैं। इसमें सीएम के कुछ नजदीकी नेताओं के भी टिकट कटे हैं।
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यही वजह है कि सीएम अखिलेश जब नए सचिवालय के उद्घाटन के लिए पहुंचे तो माहौल में तल्खी दिखाई पड़ने लगी थी। अभी युवा नेताओं की बहाली को लेकर जद्दोजहद चल ही रही थी कि सीएम की सलाह के बिना प्रत्याशियों की सूची आ गई।

युवा नेताओं में अखिलेश-शिवपाल के रिश्तों को लेकर चर्चा

सियासी माहौल का ही नतीजा था कि मंत्रियों के साथ ही सपा से निष्कासित युवा नेता व कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में सचिवालय की नई बिल्डिंग के उद्घाटन में पहुंच गए। पार्टी के घमासान का अंदाज इससे लगाया जा सकता है कि अधिकतर नेताओं के बीच मुलायम परिवार में शीर्ष स्तर पर, खासतौर से अखिलेश व शिवपाल यादव के रिश्तों को लेकर चर्चा रही।

सीएम ने मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि उन्हें प्रत्याशियों की सूची जारी किए जाने की जानकारी नहीं है। मतलब, उन्होंने साफ संकेत दे दिया कि पार्टी के टिकट तय करने में उनकी भूमिका की अनदेखी की जा रही है।

2017 के चुनाव से ज्यादा अहम है प्रत्याशी
जिस तरह पार्टी के लिए 2017 का चुनाव अहम है, उसी तरह अखिलेश यादव और शिवपाल के लिए प्रत्याशियों के चयन में उनकी भूमिका भी अहम है। शायद 2017 के समीकरणों को देखते हुए इसकी कोशिशें की जा रही है। किसके साथ, कितने विधायक हैं, पार्टी में वजन का यही पैमाना होता है। अखिलेश इस मामले में पीछे नहीं रहना चाहते।

वह एक कार्यक्रम में सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि इम्तिहान मेरा होना है, इसलिए टिकटों के वितरण का अधिकार मेरा होना चाहिए। यही बात वह सपा सुप्रीमो से बता चुके हैं। चूंकि सपा में प्रदेश अध्यक्ष ही राज्य संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष होते हैं, इसलिए सपा के घमासान को थामने के लिए अखिलेश यादव को संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाने की बात उठी थी। इसके लिए संविधान में संशोधन जरूरी है लेकिन पार्टी में इसके लिए प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।

निर्णायक स्थिति में पहुंच सकती है सपा की जंग

अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद युवा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के बाद सीएम के नजदीकी कई नेताओं पर गाज गिरी है। तीन एमएलसी समेत सात युवा नेता बर्खास्त किए हैं। मैनपुरी के एमएलसी व रामगोपाल यादव के भांजे अरविद प्रताप यादव भी निष्कासित हो चुके हैं।

कुछ नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उन पर भी कार्रवाई लगभग तय है। अभी युवा नेताओं पर कार्रवाई का विवाद निपटा नहीं था कि प्रत्याशियों की सूची ने नया विवाद पैदा कर दिया। सपा के सूत्र बताते हैं कि सीएम की नाराजगी किसी भी दिन आक्रोश के रूप में सामने आ सकती है। हालांकि मुलायम सिंह के रहते डेमेज कंट्रोल की संभावना रहती है लेकिन स्थिति पार्टी के दोफाड़ होने तक भी जा सकती है।

यूं भी सपा में इन दिनों प्रदेश से जिलों तक में अलग-अलग खेमे खड़े हो गए हैं। विधायक और मंत्री भी इससे अछूते नहीं है। हालांकि वे पार्टी के विवाद पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

मुलायम ने सुलह के फार्मूले पर की चर्चा
मुलायम सिंह ने सोमवार को अपने आवास पर शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव के साथ पार्टी में शीर्ष स्तर पर चले रहे टकराव में सुलह के फार्मूले पर चर्चा की। 13 सितंबर को अखिलेश यादव को हटाकर शिवपाल को अध्यक्ष बनाए जाने के बाद रामगोपाल लखनऊ में पहली बार मुलायम सिंह के साथ बैठे थे। करीब 40 मिनट की बातचीत किसी सर्वमान्य समझौते पर नहीं पहुंच पाई।
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मुलायम ने दिया निर्देश, कोई नहीं बोलेगा मीडिया के सामने

मुलायम ‌सिंह यादव - फोटो : amar ujala
मुलायम सिंह ने कुनबे के विवाद को निपटाने के लिए उच्चस्तरीय बैठक की। सपा की प्रत्याशियों की सूची जारी होते ही रामगोपाल दिल्ली से लखनऊ के लिए रवाना हो गए। हालांकि उनका यहां आने का कार्यक्रम पहले से निधारित था।

रामगोपाल दोपहर में वीवीआईपी गेस्ट में कुछ देर रुककर मुलायम सिंह से मिलने उनके विक्रमादित्य मार्ग स्थिति आवास पर गए। उनकी पहले मुलायम सिंह से वार्ता हुई और उसके बाद वहीं शिवपाल सिंह यादव से अलग से अकेले में बातचीत हुई। इस बातचीत में मैनपुरी के एमएलसी के निष्कासन का मामला भी उठा।

इसके बाद रामगोपाल और शिवपाल की नेताजी (मुलायम सिंह) के साथ बातचीत हुई। आखिर में सीएम अखिलेश यादव को बुलाया गया। वह परिवार के शीर्ष नेताओं की सामूहिक बैठक में थोड़ी देर ही मौजूद रहे। मुलायम ने निर्देश दिए हैं कि कोई भी नेता पार्टी के विवाद पर मीडिया में या सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं बोले।

अखिलेश-शिवपाल में मतभेद नहीं
मुलायम सिंह के घर से निकलने के बाद रामगोपाल यादव ने मीडिया के सवालों के जवाब में सिर्फ इतना कहा कि अखिलेश यादव और शिवपाल में कोई मतभेद नहीं है। प्रत्याशियों की घोषणा पर भी उन्होंने किसी की नाराजगी से इन्कार किया।

उन्होंने अमनमणि त्रिपाठी को टिकट देने की यह कहते हुए वकालत की कि वह पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री को प्रत्याशियों की सूची जारी किए जाने की जानकारी न होने पर उन्होंने कहा कि प्रत्याशी के चयन में प्रदेश अध्यक्ष व संसदीय बोर्ड की भूमिका होती है।
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