ग्रामीणों के हमले में क्षतिग्रस्त जीप।
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बुधवार को धनीराम का शव राप्ती नदी के किनारे मिला है। आसपास के लोगों का आरोप है कि डायल-100 की गाड़ी से धनीराम का शव नदी के किनारे ठिकाने लगाने के लिए लाया गया था। इसी बात की चर्चा क्षेत्र में आग की तरह फैल गई और लोगों की भीड़ जमा हो गई। वहीं एएसपी एसके सिंह का कहना है कि मृतक का शव मिलने की सूचना ग्रामीणों ने ही डायल-100 को दी थी तथा सूचना पाकर डायल 100 की गाड़ी मौके पर पहुंची थी। ग्रामीणों का आरोप पूरी तरह से निराधार व झूठा है।
देखते ही देखते भीड़ ने पुलिस टीम पर किया हमला
रजवापुर गांव के निकट ही शव लेने पहुंची पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने देखते ही देखते पत्थर व लाठी-डंडे से हमला कर दिया। लोगों का आरोप था कि पुलिस की मिलीभगत से ही धनीराम की हत्या की गई है। तीन दिन तक पुलिस आरोपियों को बचाने के चक्कर में लीपा पोती कर रही थी। शव को तीन दिन बाद नदी के किनारे फेंका गया है। लोग इतने गुस्से में थे कि उन्होंने लाठी-डंडे व पत्थर से पुलिस को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। पुलिस कर्मी जान बचाकर भागे और कुछ लोग गाड़ियों में बैठकर भागे। गाड़ी में न बैठ पाए सिपाही को भीड़ ने दौड़ा दौड़ाकर मारा।
भारी सुरक्षा के बीच लाया गया शव
भीड़ के हमलावर होने तथा पुलिस टीम के भागने के बाद मौके पर पहुंचे डीएम राकेश कुमार मिश्र, एडीएम एके शुक्ला, एसपी प्रमोद कुमार व एएसपी एसके सिंह ने मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। भीड़ के गुस्से को देखते हुए कई थानो समेत भारी संख्या में फोर्स मंगा ली गई। फोर्स के आने के बाद पुलिस भारी सुरक्षा के बीच धनीराम का शव लेने रजवापुर गांव के निकट राप्ती नदी के किनारे पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्ट मार्टम के लिए भेज दिया।
शव लेकर आ रही पुलिस टीम पर नौबस्ता गांव के निकट भीड़ ने हमला कर दिया। जिसमें महिला थानाध्यक्ष मीना सिंह, महिला सिपाही मारिया सिद्दीकी, रुचि, चन्द्रसेन, फारुख अहमद, अखिलेश यादव, उबैद अहमद और नीरजा यादव घायल हुए हैं। उग्र भीड़ ने गौरा थानाध्यक्ष इकरार अहमद से भी हाथापाई की। अपनी सुरक्षा में पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया और लोगों को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। ग्रामीणों का आरोप है कि गैस के गोले से गांव के एक छप्पर में आग लग गई। पुलिस पांच लोगों को गिरफ्तार कर थाने ले आई है।