डिप्टी कलेक्टर के कारण मरीजों का इलाज मुश्किल हो गया। जिस वक्त वे आए उस वक्त एक हेड इंजरी के पेशेंट का इलाज किया जा रहा था। मरीजों की काफी भीड़ थी। उनके साथ सुरक्षाकर्मी भी इमरजेंसी में घुस आए। जब सुरक्षाकर्मियों बाहर करने की बात कही तो वह बदसलूकी करने लगे और अपशब्दों का इस्तेमाल किया। इसकी शिकायत लिखित तौर पर अस्पताल प्रशासन से की गई है। डिप्टी कलेक्टर ने डीएम को फोन करके शिकायत की। इसी के बाद हजरतगंज कोतवाली केस दर्ज कराने गए।
पहले भी ऐसा ही बर्ताव किया था डॉक्टर ने
मामले पर डिप्टी कलेक्टर (राजस्व) व एसीएम चतुर्थ अमित कुमार का कहना है कि अग्निकांड से जुड़े एक मामले में पीड़ित का इलाज सिविल की बर्न यूनिट में हुआ था। मामले की मजिस्ट्रेटी जांच चल रही है और चिकित्सकों का बयान दर्ज करने अस्पताल की इमरजेंसी बुधवार को गया था। मौजूद डाक्टरों ने असहयोग किया और बयान दर्ज कराने में आनाकानी की। बाद में होमगार्ड की उपस्थिति को लेकर हंगामा कर झूठा आरोप लगाया। शिवरात्रि पर व्रत रखने के बावजूद नशे में होने का आरोप इसका सीधा प्रमाण है। मामले को तूल देना उचित नहीं। सिविल के डॉक्टर पहले भी बयान लेने पहुंचे एसीएम प्रथम के साथ इसी तरह का बर्ताव कर चुके हैं।
दोनों पक्षों में गलतफहमी से विवाद
सीओ हजरतगंज अभय कुमार मिश्रा ने बताया कि दोनों पक्षों को गलतफहमी हो गई थी। एक दूसरे को पहचानते नहीं थे। मामले की जानकारी हासिल करने के बाद दोनों पक्षों से तहरीर देने को कहा गया, पर दोनों ने अपनी गलती मानते हुए एक दूसरे से माफी मांग ली और कार्रवाई न करने की बात कही। इसके बाद दोनों लोगों को जाने दिया गया।