राजधानी में भी ब्राजील की तर्ज पर सिटी बसें बिना कंडक्टर के ही चलेंगी। शुरूआत में यह सिटी बसें ट्रायल के तौर पर चलाई जाएंगी। इसके लिए लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज कंपनी की 20 मार्कोपोलो बसों का चयन किया है।
इनमें जल्द ही एमएसटी कार्ड को टच करने का सिस्टम लगाया जाएगा। ब्राजील के साओ पाउलो और रियो-डी-जनेरो गए अध्ययन दल के कई परिवहन अफसर रविवार को वापस आ गए। जिसमें सिटी बस के प्रबंध निदेशक ए रहमान भी थे।
ब्राजील के कई शहर में सिटी बस की सवारी करके व्यवस्था का जायजा लेने वाले सिटी बस के प्रबंध निदेशक ए रहमान ने बताया कि ब्राजील के शहरों में 15 हजार से अधिक सिटी बसों का संचालन बिना कंडक्टर के हो रहा है।
जिसमें सवारियों को कोई असुविधा नहीं हो रही है। ब्राजील सरकार ने अध्ययन दल को सफर के लिए पास मुहैया कराया। इससे रियो-डी-जनेरो शहर की सिटी बस में सफर करके संचालन एवं तकनीक को परखा गया।
इसके बाद राजधानी में ब्राजील की तर्ज पर बिना कंडक्टर के ही सिटी बसें चलाने का फैसला हुआ है। रहमान ने बताया कि लखनऊ सिटी बेड़े की 45 मार्कोपोलो में से 20 की हालत अच्छी है, जिन्हें बिना कंडक्टर के संचालित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि नगर विकास विभाग से मिलने वाली राशि से 20 मार्कोपोलो बस में टच सिस्टम लगाएंगे। इस सिस्टम को बस के अगले गेट पर लगाएंगे।
इससे एंट्री करने वाली सवारी को एसएसटी कार्ड को सिस्टम से टच कराने के बाद मेट्रो स्टेशन की तरह बस के अंदर प्रवेश मिलेगा। निगम के प्रबंध निदेशक मुकेश कुमार मेश्राम के वापस लौटने के इस प्रस्ताव को शासन ले जाएंगे।
प्रबंध निदेशक ने बताया कि ये सिटी बसें तय स्टॉप पर रुकती हैं। लोग आगे से चढ़ते हैं और पीछे से उतरते हैं। इमरजेंसी में जिसको उतरना है तो वह डोरी के सहारे घंटी बजाता है और इससे बस रुक जाती है।
सवारियों को यह सुविधा सिर्फ इमरजेंसी में ही मिलती है। यही व्यवस्था 20 मार्कोपोलो बस में लागू करेंगे। सबसे पहले बेड़े की पुरानी बसें हटाकर नई शामिल की जाएंगी।
यह बसें ब्राजील की तर्ज पर बनेंगी और उनका कंडक्टर के बिना ही संचालन होगा। सिटी बस का बेड़ा बदलने में केंद्र सरकार मदद करेगी। प्रबंध निदेशक ने बताया कि राजधानी की सिटी बसों की हालत काफी खराब हो चुकी हैं।