जल्द ही सूबे में शहरों का दायरा और संख्या में इजाफा होगा। राज्य सरकार कुछ पालिका परिषदों को नगर निगम, नगर पंचायतों को पालिका परिषद और बड़े गांवों को नगर पंचायत का दर्जा देगी। नगर विकास विभाग ने इस संबंध में विभागों से प्रस्ताव मांगे हैं।
जानकारों की मानें तो मथुरा-वृंदावन और फैजाबाद-अयोध्या को पहले चरण में नगर निगम दर्जा देने की तैयारी है। राज्य सरकार ने हाल ही में फीरोजाबाद को नगर निगम और अमेठी को पालिका परिषद का दर्जा दिया है।
इसके अलावा जौनपुर में बदलापुर, मऊ में वलीदपुर तथा आजमगढ़ में माहुल को नगर पंचायत बनाया गया है। राज्य सरकार आबादी के आधार पर नगर निगम, पालिका परिषद, और नगर पंचायतें बनाना चाहती है। सरकार का मानना है कि नए सिरे से निकायों का गठन होने के बाद इन क्षेत्रों को शहरी सुविधाएं मिलने लगेंगी।
इसलिए मौजूदा समय निकायों के पुनर्गठन की प्रक्रिया काफी तेजी से चल रही है। नगर विकास विभाग ने सभी प्रमुख सचिवों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों, निदेशक पंचायतीराज तथा स्थानीय निकाय निदेशक का पत्र लिखकर इस संबंध में जल्द से जल्द प्रस्ताव उपलब्ध कराने को कहा है।
मांगे गए प्रस्ताव में यह कहा गया
नगर विकास विभाग के मांगे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि जनगणना 2011 के आधार पर क्षेत्रों में आबादियां संख्या बढ़ गई हैं। इसलिए इन क्षेत्रों में और अधिक नागरिक सुविधाएं विकसित करने की जरूरत है।
लिहाजा नए सिरे से नगर पंचायत, पालिका परिषद और नगर निगमों के निर्धारण की जरूरत है। इसलिए अगस्त 2001 में जारी शासनादेश के आधार पर प्रस्ताव उपलब्ध कराए जाएं।
फैक्ट फाइल (सूबे में अभी हैं)
14 नगर निगम
195 पालिका परिषद
426 नगर पंचायतें
क्या हैं मानक और क्या होंगे बदलाव
अगस्त 2001 में जारी शासनादेश के मुताबिक पालिका परिषद के लिए 50 हजार और नगर पंचायत के लिए 20 हजार से अधिक आबादी होनी चाहिए। इसके अलावा क्षेत्र का 75 प्रतिशत या उससे अधिक लोगों का व्यवसाय कृषि के अतिरिक्त अन्य होना चाहिए।
सड़क यातायात बेहतर होने के साथ पुलिस थाना, विकास खंड, आसपास व्यवसाय के केंद्र, स्कूल, हेल्थ सेंटर, बिजली, बैंक, पोस्ट ऑफिस होने पर यह दर्जा दिया जा सकता है। नगर निगम के लिए पांच लाख से अधिक आबादी होनी चाहिए। सुविधाओं के आधार पर भी राज्यपाल से अनुमति लेकर नगर निगम बनाया जा सकता है।
बढ़ेंगी नागरिक सुविधाएं
पालिका परिषद को नगर निगम, नगर पंचायत को पालिका परिषद और ग्राम सभाओं को नगर पंचायत का दर्जा दिए जाने के बाद इन क्षेत्रों में रहने वालों को बेहतर नागरिक सुविधाएं मिलने लगेंगी। इन क्षेत्रों को शहर मानते हुए विकास कराया जाएगा।
सड़क, नाली, सीवर, पाइप लाइन से बेहतर पेयजल आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट, पार्क की सुविधाएं दी जाने लगेंगी। इसके अलावा नए बनने वाले नगर निगम और पालिका परिषदों में केंद्रीय मदद के आधार पर विकास कार्य कराए जा सकेंगे। इसलिए नगर विकास विभाग चाहता है कि आबादी के हिसाब से निकायों के विस्तार का काम पूरा कर लिया जाए।