विनीत चतुर्वेदी
लखनऊ। औषधीय पौधों से इंसानों के इलाज के बाद अब इनके इस्तेमाल से पशुओं की सेहत सुधारने पर भी शोध होगा। राजधानी स्थित केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) ने दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (डुवासू), मथुरा के साथ इसके लिए समझौता किया है। दोनों संस्थान मिलकर पशु चिकित्सा और पोल्ट्री क्षेत्र में औषधीय पौधों पर आधारित उपचार और उत्पाद विकसित करेंगे।
एंटीबायोटिक का विकल्प तलाशेंगे
शोध में पशुओं के इलाज में एंटीबायोटिक के सुरक्षित विकल्प तलाशने पर खास जोर रहेगा। एंटीबायोटिक के ज्यादा इस्तेमाल से रोगाणुओं में दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही है। वैज्ञानिक औषधीय पौधों के ऐसे तत्वों की पहचान करेंगे, जो संक्रमण से लड़ने में मदद कर सकें।
लिवर और त्वचा रोगों पर भी शोध
वैज्ञानिक यह भी देखेंगे कि औषधीय पौधे पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कितने उपयोगी हैं। लिवर और त्वचा संबंधी रोगों के इलाज में भी इनकी भूमिका जांची जाएगी। पोल्ट्री फार्मों में संक्रमण रोकने और स्वच्छता बनाए रखने के लिए पौधों से बने प्राकृतिक उत्पादों की उपयोगिता भी परखी जाएगी।
पशुपालकों तक पहुंचाएंगे तकनीक
दोनों संस्थानों का लक्ष्य शोध को केवल प्रयोगशाला तक सीमित रखना नहीं है। उपयोगी तकनीक मिलने पर उसे पशुपालकों और पोल्ट्री क्षेत्र तक पहुंचाने की कोशिश होगी। इससे रासायनिक दवाओं पर निर्भरता कम करने और टिकाऊ पशुपालन को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। हाल ही में सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी और डुवासू के कुलपति डॉ. अभिजीत मित्रा की उपस्थिति में यह समझौता हुआ।