लखनऊ। राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान की ओर से आयोजित दो दिवसीय वार्षिक गुलाब एवं ग्लैडिओलस प्रदर्शनी का रविवार का समापन हो गया। हर साल की तरह इस साल भी फूलों की प्रदर्शनी में सीमैप संस्थान अव्वल रहा। इस साल विभिन्न श्रेणी के 16 ट्राॅफियों में से कुल 11 ट्राॅफियां सीमैप की झोली में आए। केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौध संस्थान (सीमैप) 205 में से 47 पुरस्कार जीतने के साथ ही 23 श्रेणियों में प्रथम पुरस्कार पाकर सर्वश्रेष्ठ रहा।
सर्दी के मौसम में गुनगुनी धूप के बीच लगे इस दो दिवसीय प्रदर्शनी के आखिरी दिन फूलों में दिलचस्पी रखने वाले दर्शकों की बड़ी संख्या में मौजूदगी से एनबीआरआई लॉन गुलजार रहा। गुलाब व ग्लैडियोलस के मनोहारी फूलों की विभिन्न श्रेणियों में इस साल कुल 16 ट्रॉफियां व विभिन्न वर्गों में विजेताओं को 147 पुरस्कार दिए गए। इसमें 60 प्रथम पुरस्कार, द्वितीय 56 और 31 सांत्वना पुरस्कार शामिल रहे। प्रदर्शनी में लखनऊ व अन्य शहरों से 17 प्रदर्शकों ने कुल 205 प्रविष्टियां प्रदर्शित कीं। अन्य विजेताओं में आलमबाग के कैलाश नाथ मौर्य व कैंट स्थित कार्यशाला दिलकुशा गार्डेन के अलावा व्यक्तिगत श्रेणी में कैंट के अभिषेक राठौर व वेदांश आदि रहे। इस मौके पर एनबीआरआई के निदेशक डॉ. अजित कुमार शासनी, सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी, सीडीआरआई की निदेशक डॉ. राधा रंगराजन आदि मौजूद रहे।
गुलदाउदी की नई किस्मों व इत्र का विमोचन
मुख्य अतिथि नई दिल्ली से आईं सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन कलैसेल्वी ने संस्थान के निदेशक डॉ. अजित कुमार शासनी के नेतृत्व की तारीफ की। उन्होंने एनबीआरआई के कैलेंडर आदि का विमोचन किया। उन्होंने गुलदाउदी की चार नई किस्मों का भी विमोचन किया। इसमें मधुमक्खी पालन के लिए मुफीद गुलदाउदी की एक किस्म ''सरस्वती'' भी शामिल थी। यह प्रजाति भारी मात्रा में पराग पैदा करती है और बड़ी संख्या में मधुमक्खियों को आकर्षित करती है।
साथ ही दो नए बेलपत्र आधारित इत्र : फ्रोटस-रुद्र और फ्रोटस-कुंभ भी लॉन्च किए गए। ये इत्र बेलपत्र के सुगंधित तेल से बने हैं। फ्रोटस-रुद्रा सुगंध बेलपत्र की पत्तियों से, जबकि फ्रोटस-कुंभ बेल के फल से निकाले गए खुशबू से बना है। संस्थान द्वारा विकसित 90के एसएनपी कॉटन चिप तकनीक को आईएलएस लिमिटेड को हस्तांतरित भी किया गया।