सड़क किनारे डंप कूड़ा। (सांकेतिक)
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राजधानी लखनऊ में कूड़ा प्रबंधन के काम में लापरवाही पर लगा 56.94 करोड़ रुपये का जुर्माना जमा किए बिना ही चीनी कंपनी इकोग्रीन एनर्जी शहर से बोरिया बिस्तर समेट कर चली गई है। शहर में जिस पते पर कंपनी का ऑफिस था, अब वहां पर उसका निशान तक नहीं है। ऐसे में जुर्माने की रिकवरी करने के लिए जिला प्रशासन की टीम भटक रही है। अब उसने नगर निगम से कंपनी के उन खातों की जानकारी मांगी है, जिसमें पैसा भेजा जाता था।
कंपनी का पंजीकृत पता भी मांगा है। कचरा प्रबंधन योजना में ज्योति इनवायरोटेक कंपनी के फेल होने के बाद नगर निगम ने 2017 में चीनी कंपनी इकोग्रीन एनर्जी को काम दिया था। इस कंपनी ने करीब दो साल तो सही से काम किया, मगर उसके बाद फर्जीवाड़ा करने लगी। लापरवाही के कारण शिवरी प्लांट पर करीब 20 लाख मीट्रिक टन कूड़े का पहाड़ बन गया।
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इस पर एनजीटी ने 40 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने के साथ ही नगर आयुक्त का वेतन तक रोका। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी जुर्माना लगाया। यह जुर्माना साल 2019-22 के बीच कई बार में अलग-अलग था। इसके बाद भी चीनी कंपनी ने न तो काम में सुधार किया न ही जुर्माना भरा। ऐसे में जुर्माने की कुल राशि 56.94 करोड़ रुपये हो गई। कंपनी की लापरवाही को देखते हुए नगर निगम ने सितंबर 2023 में अनुबंध निरस्त कर दिया।
नगर आयुक्त ने एनजीटी को पूरी रिपोर्ट दी। इसमें बताया कि शिवरी प्लांट पर जमा कूड़े के लिए कंपनी जिम्मेदार है। इसमें नगर निगम के जिन अधिकारियों ने लापरवाही की थी, उन्हें शासन ने निलंबित कर दिया। इसके बाद नगर आयुक्त के वेतन पर लगी रोक हटी थी।