मूल्यांकन और परीक्षा पद्धति में सुधार किए जाएंगे। स्कूली शिक्षा से ही बच्चों के कौशल विकास और करिअर चुनने का अवसर देने के लिए करिअर काउंसलिंग कराई जाएगी। व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास पर जोर दिया जाएगा।
दिव्यांग, जरूरतमंद और सामाजिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने और उनमें आत्मविश्वास जगाने के लिए विद्यार्थियों के सहयोग की व्यवस्था लागू की जाएगी। सुशासन, स्कूलों में अच्छे व योग्य शिक्षक तैनात करने और स्कूल परिसर के मानक तय करने के लिए स्कूल स्टैंडर्ड अथॉरिटी का गठन किया जाएगा।
शिक्षा में निवेश आमंत्रित करने के लिए पीपीपी मॉडल विकसित किया जाएगा। शिक्षा में तकनीक को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल शिक्षा और डाटा मैनेजमेंट पर जोर दिया जाएगा। शिक्षकों की क्षमता संवर्धन के साथ नई भर्तियां की जाएंगी।