प्रेसवार्ता करतीं डाॅ. भावना एम सिंह।
लखनऊ। डाउन सिंड्रोम पीड़ित बच्चे बाकियों से कुछ अलग होते हैं। बचपन से ही अगर इन्हें प्रशिक्षित किया जाए तो ये सामान्य जीवन जी सकते हैं। डाउन सिंड्रोम फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित प्रेसवार्ता में डाॅ. भावना एम सिंह ने बताया कि फेडरेशन की ओर से बृहस्पतिवार से तीन दिवसीय सम्मेलन की शुरुआत हो रही है। इसका शुभारंभ राज्य आयुक्त दिव्यांगजन हिमांशु झा अयोध्या रोड स्थित रिजाॅर्ट में करेंगे।
इस माैके पर डाउन सिंड्रोम पीड़ित बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे। सम्मेलन के दाैरान शुक्रवार और शनिवार को देश भर से आए विशेषज्ञ बच्चों के मामलों पर मंथन करेंगे। डाउन सिंड्रोम फेडरेशन ऑफ इंडिया डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों के परिवार को सहयोग करता है। उनकी काउंसिलिंग करके उन्हें बच्चों को प्रशिक्षित करने के लिए तैयार किया जाता है।
क्या है डाउन सिंड्रोम
डाउन सिंड्रोम आनुवंशिक स्थिति है। इससे पीड़ित बच्चों में एक अतिरिक्त गुणसूत्र होता है। इससे बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास में देरी होती है। इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन शुरुआती पहचान और सहायता से समस्याओं का प्रबंधन किया जा सकता है।
लक्षण-
चपटा चेहरा, आंखों के ऊपर की ओर झुकाव, छोटा कद, मांसपेशियों का कमजोर होना, हथेली पर एक गहरी सिलवट, उभरी हुई जीभ।