लखनऊ। सिर की जन्मजात बीमारी केनियोफेशियल सिंड्रोम से जूझ रही 11 साल की बच्ची की लोहिया संस्थान में जटिल सर्जरी हुई है। नौ घंटे तक चली सर्जरी में पीजीआई के डॉक्टरों का सहयोग लिया गया। डॉक्टरों का दावा है कि लोहिया में इस तरह का पहला ऑपरेशन हुआ है।
गोंडा निवासी किसान की बेटी आराध्या सिंह के सिर का आकार जन्म से बढ़ता जा रहा था। उसे सिर में दर्द, चक्कर और उल्टी की शिकायत थी। आंखों की रोशनी भी कमजोर हो रही थी। परिजनों ने बच्ची को लोहिया संस्थान के न्यूरो सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. दीपक सिंह को ओपीडी में दिखाया।
जांच में सिर की गंभीर बीमारी केनियोफेशियल सिंड्रोम की पुष्टि हुई। डॉ. सिंह ने बताया कि जन्म के समय बच्चों के सिर की हड्डियां कई हिस्सों में बंटी होती हैं। छह महीने बाद से ये आपस में धीरे-धीरे जुड़ना शुरू होती हैं और 11 साल की उम्र तक सारी हड्डियां आपस में जुड़ती हैं। आराध्या के मामले में ऐसा नहीं हुआ। हड्डियां समय से पहले ही जुड़ जाने से उसके सिर का विकास प्रभावित होने लगा। इसका असर चेहरे, आंखों पर भी पड़ा। जटिल सर्जरी में पीजीआई के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजीव अग्रवाल का सहयोग लिया गया।
सिर दर्द, उल्टी व चक्कर से मिली निजात
डॉ. सिंह ने बताया कि न्यूरो साइंस सेंटर भवन की ओटी में बच्ची की सर्जरी नौ घंटे तक चलीं। उसके सिर की हड्डी के चार टुकड़े किए गए, ताकि दिमाग का विकास हो सके। हड्डी के दो छोटे टुकड़े निकालकर आंखों के ऊपर व नीचे के हिस्से में प्रत्यारोपित किए गए। इससे आंखें सामान्य रूप से भीतर जाएंगी। चेहरे की विकृति भी डेढ़ से दो साल में सही होगी। बच्ची को सिर दर्द, उल्टी व चक्कर से निजात मिल गई है।