पीजीआई में लिवर ट्रांसप्लांट की कोशिश फिर नाकाम हो गई। बीते 25 जनवरी को लिवर ट्रांसप्लांट कराने वाले नौ साल के सुहेल ने शुक्रवार को दम तोड़ दिया। पीजीआई प्रशासन पूरे मामले को दबाए रहा। सोमवार को भी इस मुद्दे पर कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार नहीं हुआ। देर शाम निदेशक प्रो. राकेश कपूर ने बताया कि ट्रांसप्लांट के बाद बच्चे को सेप्टीसीमिया हो गया था, इस वजह से रिकवरी नहीं हो पाई।
पीजीआई में भर्ती कराए गए बहराइच निवासी सुहेल को लिवर सिरोसिस हो गया था। उसका लिवर फेल होने की स्थिति में पहुंच गया था। इसके बाद बीते 25 जनवरी को उसका लिवर ट्रांसप्लांट हुआ। ट्रांसप्लांट के बाद डोनर मां को सप्ताह भर चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया। ठीक होने के बाद उसे छुट्टी दे दी गई, जबकि बच्चे को वेंटिलेटर पर रखा गया है। ट्रांसप्लांट के बाद पीजीआई प्रशासन ने दावा किया था कि यह लिवर चिकित्सकीय लिहाज से बेहतरीन है।
बच्चे को 15 दिन वेंटिलेटर पर रखा जाएगा। इसके बाद वह स्वस्थ हो जाएगा, लेकिन धीरे-धीरे बच्चे की स्थिति बिगड़ती गई। 22 फरवरी को उसकी मौत हो गई। पीजीआई प्रशासन इस मामले को दबाए रखा। सोमवार सुबह एसजीपीजीआई प्रशासन इस मुद्दे पर बोलने से कतराता रहा, लेकिन देर शाम निदेशक राकेश कपूर ने मौत की वजह इंफेक्शन बताया।