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Lucknow News: दुर्लभ वाद्ययंत्रों को पुनर्जीवित कर रहे बाल कलाकार

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भारी-भरकम परंपरागत वाद्ययंत्र विचित्र वीणा पर राग भोपाली बजाते वाराणसी के शिवांश सिंह। 
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी में चल रही प्रादेशिक संगीत प्रतियोगिता के दौरान बाल वर्ग में वाराणसी के शिवांश सिंह ने जब भारी-भरकम परंपरागत वाद्ययंत्र विचित्र वीणा पर राग भोपाली बजाना शुरू किया तो सामने बैठे दर्शकों के साथ ही निर्णायक भी दंग रह गए। अमूमन विचित्र वीणा जैसे वाद्ययंत्र अब धीरे-धीरे संगीत के चलन से बाहर होते जा रहे हैं क्योंकि इन्हें बजाना बेहद कठिन माना जाता है। ऐसे में जब कोई बच्चा इसे सुरीले अंदाज में बजाए तो चौंकना लाजिमी भी है। प्रतियोगिता के दौरान कई अन्य बाल कलाकारों ने भी सरोद और मेंडोलिन बजाकर दर्शकों का दिल जीत लिया।
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प्रयागराज के अशित सांई ने मेंडोलिन पर राग अहीर भैरव बजाकर खूब वाहवाही लूटी। 14 वर्ष के अशित जब तीन वर्ष के थे, तब से संगीत की शिक्षा ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि मेंडोलिन की शिक्षा अपने गुरु सचिन चंद्रा और हरिकृष्ण मलिक से मिली। वे इससे पहले प्रयागराज में मतदाता जागरूकता गीत तैयार कर चुके हैं जिसे उन्होंने अपने भाई के साथ मिलकर गाया और संगीत भी तैयार किया। प्रतियोगिता में भाग लेने लखनऊ आए अशित के पिता रेलवे विभाग में कार्यरत वीरेंद्र ने बताया कि अशित ने पिछले दिनों महाकुंभ का थीम सॉन्ग और स्वच्छता अभियान का गीत भी तैयार किया था। बाल वर्ग में ही सहारनपुर के रुद्र मोगा ने सरोद पर राग किरवानी बजाकर खूब वाहवाही लूटी। कवनप्रीत सिंह ने सितार पर मियां की मल्हार से प्रशंसा पाई।
संगीत नाटक अकादमी के निदेशक डॉ. शोभित नाहर ने बताया कि यह एक शुभ संकेत है कि विलुप्त होने की कगार पर खड़े कई वाद्ययंत्रों को आज की नई पीढ़ी अपना रही है और इन्हें पुनर्जीवित कर रही है। इस बार बहुत से कलाकारों ने दुर्लभ वाद्ययंत्रों पर प्रस्तुति देकर संगीत के क्षेत्र में सुनहरे भविष्य का संकेत दिया है।
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