सीएम योगी आदित्यनाथ ने कोविड हॉस्पिटल का लोकार्पण किया।
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जिला अस्पताल में 300 बेड के डेडीकेटेड कोविड-19 हास्पिटल का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को किया। उन्होंने कोरोना को मात देने में गोंडा की भूमिका को अहम बताया। प्रदेश में नोएडा के बाद गोंडा में कोविड हास्पिटल की सौगात मिली है। इसके साथ मुख्यमंत्री ने कहा कि अब वह दिन दूर नहीं जब देवीपाटन मंडल में तीन मेडिकल कालेज होंगे। उन्होंने बहराइच में संचालित किए गए मेडिकल कालेज का हवाला देते हुए कहा कि बलरामपुर में केजीएमयू के सेटेलाइट सेंटर को भी मेडिकल कालेज का दर्जा मिलेगा। इसके अलावा में जल्द ही गोंडा के मेडिकल कालेज का निर्माण शुरू होगा। इससे आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य की सुविधाएं और अच्छे ढंग से मुहैया हो सकेंगी।
उधर, सीएम योगी के जिला पहुंचने से पहले एटीएस कंट्रोल रूम की सूचना पर मनकापुर कोतवाली पुलिस ने आईटीआई से एक संदिग्ध को उठाया है। युवक का नाम सम्पूर्णा नंद शुक्ल बताया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछड़े क्षेत्रों को विकसित करने की मुहिम में देवीपाटन मंडल के तीन जनपद बलरामपुर, श्रावस्ती व बहराइच शामिल हैं। नीति आयोग के निर्देशन में स्वास्थ्य , शिक्षा, कृषि,कौशल विकास, रोजगार सृजन समेत कई योजनाओं का संचालन इन जिलों में करके उन्हें विकसित किया जा रहा है। इन तीनों जिलों का मुख्यालय गोंडा है इसलिए यह जनपद काफी अहमियत रखता है। सीएम ने कहा कि गोंडा कोविड हास्पिटल में 17 वेंटीलेटर वेड हैं इनका जल्द ही विस्तार करेंगे। जिससे आम लोगों को इलाज की बेहतर सुविधा मिल सके।
उन्होंने बताया कि मार्च में सिर्फ एक टेस्टिंग लैब प्रदेश में था और 60 जांचें हो पा रही थीं। मौजूदा समय में 200 टेस्टिंग लैब संचालित हैं जिसमें 36 आरटीपीसीआर टेस्टिंग लैब है। हर जिले अस्पताल में ट्रूनेट मशीन और एंटीजेन किट से जांच की सुविधा मुहैया कराकर प्रतिदिन एक 1.40 लाख जांच का रिकार्ड बनाया है। देश में यह सर्वाधिक जांच करने वाला प्रदेश बन चुका है। आम लोगों की सेहत को सुरक्षित रखने के लिए हेल्थ इन्फ्रास्टक्चर कम समय में ही किया गया है। उन्होंने कोरोना को जड़ से खत्म करने के लिए सर्विलांच पर जोर देते हुए कहा कि हल्की से जुकाम बुखार को भी गंभीरता से लिया जाए। लोगों को जागरूक किया जाए कि वे इसे मौसमी न मानें, अपनी विधिवत जांच कराएं। जांच के दायरे में अनिवार्य रूप से बुजुर्ग,गर्भवती महिलाओं व दस साल के छोटे बच्चों में हल्का सा लक्षण देखने पर भी लाने को कहा।