परिषद के उपाध्यक्ष पद पर किसी सेवानिवृत्त शीर्ष अधिकारी को दायित्व मिल सकता है। अयोध्या के मंडलायुक्त, जिला मजिस्ट्रेट, मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक, उपाध्यक्ष-अयोध्या विकास प्राधिकरण, अयोध्या क्षेत्र की जानकारी रखने वाले पांच व्यक्ति भी सदस्य के रूप में नामित होंगे।
वहीं, ऐसे दानदाता जो 10 करोड़ से ज्यादा का दान देते हों, वे नाम निर्दिष्ट सदस्य के रूप में रखे जाएंगे। राज्य सरकार इस परिषद के लिए विधि सलाहकार का चयन भी करेगी जो परिषद को कानूनी सलाह देगा। कामकाज देखने को सीईओ भी नियुक्त किया जाएगा।
अयोध्या के जिलाधिकारी अनुज कुमार झा का कहना है कि अयोध्या के पौराणिक-सांस्कृतिक व ढांचागत विकास के लिए अयोध्या तीर्थ विकास परिषद नाम से एक संस्था की जरूरत थी, इसकी चर्चा शासन में कई बार हो चुकी है।
राममंदिर पर फैसला आने के बाद जैसे ही मंदिर निर्माण शुरू होगा, यहां पर्यटकों-भक्तों के आने का सिलसिला तेज हो जाएगा। इसलिए अब जल्द शासकीय संस्था का स्वरूप सामने आ सकता है। शासन के निर्देश पर अयोध्या विकास प्राधिकरण से एनओसी भेज दी गई है। शासन को अन्य जो भी रिपोर्ट चाहिए होती है, उसे तत्काल भेजा जा रहा है।
अयोध्या के साथ बाराबंकी, गोंडा, बस्ती व अंबेडकरनगर जिले से होकर 84 कोसी परिक्रमा मार्ग गुजरा है, जिसकी कुल लंबाई करीब 252 किमी है, जिसके किनारे तमाम रामायणकालीन स्थलों के साथ सिद्ध ऋषि-मुनियों की तपस्थली और मठ-मंदिर भी हैं।
इस परिक्रमा की शुरूआत ही बस्ती के मखौड़ा नामक स्थल से होती है, जहां महाराजा दशरथ ने पुत्रेष्ठी यज्ञ किया था, जिसके बाद स्वयं भगवान विष्णु स्वरूप राम समेत चारों भाई भरत, लक्ष्मण व शत्रुघ्न का जन्म हुआ था। इन्हीं के प्रताप से रावण का वध हुआ और बाद में राजसूय यज्ञ कर अयोध्या विश्व विजयी कहलाई।