मुख्यमंत्री ने कहा कि वह सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए बनी समिति की बैठक में शमिल होते हैं। इस दौरान सामने आया कि सड़कों पर ‘ब्लैक स्पॉट’ चिह्नित करना सबसे जरूरी है। सड़कों पर लगने वाले सूचना चिह्न गायब होने की जानकारी भी सामने आई। इसके बाद ‘आगे अंधा मोड़ है’, ‘आगे गांव है’ या ‘आगे स्कूल है’ जैसे सूचना पट पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई से बात करके लगवाए गए।
यूपी रोडवेज के ड्राइवरों के स्वास्थ्य की जांच कराई तो बहुतों की आंखें कमजोर मिलीं। इसके बाद निर्देश दिए गए कि छुट्टी देकर सभी ड्राइवरों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए। ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण के समय भी उनकी पूरी जांच हो।
उन्होंने बताया कि आपदा से निपटने के लिए एसडीआरएफ का गठन किया गया। 250 अधिकारियों को केजीएमयू से ट्रॉमा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिलाया गया। लोगों को हेलमेट और सीट बेल्ट लगाने के लिए जागरूक किया गया। चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना, स्वास्थ्य मंत्री जयप्रताप सिंह, डीजीपी ओपी सिंह, आईएटीएसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. एमसी मिश्रा ने सड़क दुर्घटना से बचने के लिए जागरूकता बढ़ाने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 108, 102 और डायल 100 को एक साथ लाया गया है, जिससे सूचना मिलने के बाद घायल तक पहुंचने में एंबुलेंस का रिस्पांस टाइम 10 मिनट हो जाए। इससे घायल को ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान ही इलाज मिल सकेगा।
इंसेफेलाइटिस का प्रकोप हुआ कम
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार के दो साल के कार्यकाल में पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में दिमागी बुखार (इंसेफेलाइटिस) के मरीजों में 35 फीसदी और इससे होने वाली मौतों में 63 फीसदी की कमी आई है। इसमें अंतर्विभागीय समन्वय और जागरूकता का बड़ा योगदान है। स्वच्छता और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता का भी ध्यान रखा गया। हमारी सरकार बनने से पहले गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में हर साल इंसेफेलाइटिस के 500 से 700 मरीज आते थे। इस वर्ष वहां 86 मरीज भर्ती हुए और मात्र छह की ही मौत हुई। आने वाले तीन साल में इंसेफेलाइटिस को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।