मुख्यमंत्री अखिलेश यादव शनिवार को बहुप्रतीक्षित परियोजना यूपी-100 की जनता को समर्पित करेंगे। योजना लॉन्च होने के बाद किसी भी तरह की समस्या होने पर पुलिस शहरों में 15 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 20 मिनट में मदद के लिए पहुंचेगी।
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इसके तहत पुलिस 24 घंटे और सातों दिन जनता की सेवा के लिए तत्पर रहेगी। परियोजना को सबसे पहले 11 जिलों में लॉन्च किया जा रहा है। इसके बाद हर हफ्ते 20 से 22 जिलों में यह परियोजना शुरू की जाएगी।
15 दिसंबर तक सभी जिलों को परियोजना के दायरे में शामिल कर लिया जाएगा। प्रमुख सचिव गृह देबाशीष पंडा ने बताया कि परियोजना के जरिए सूबे की 22 करोड़ जनता को लाभ मिलेगा।
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गृह विभाग के सलाहकार व परियोजना को देख रहे वेंकट चंगावल्ली ने बताया कि 2200 करोड़ में से अभी 850 करोड़ रुपये कैपिटल कास्ट बिल्डिंग बनाने व गाड़ियों की खरीद में खर्च हुआ है। बाकी पैसा योजना को चलाने में खर्च किया जाएगा।
एक लाख कॉल प्रतिदिन रिसीव करने की क्षमता
जनता की सुरक्षा के लिए बनी इस योजना में एक रुपये प्रति व्यक्ति एक माह का खर्च है। इसके अत्याधुनिक कॉल सेंटर में 200 लोगों के बैठने और एक लाख कॉल प्रतिदिन तक रिसीव करने की व्यवस्था की गई है। एक बार में 600 फोन लाइन काम करेगी। आने वाले समय में प्रतिदिन कॉलों की संख्या दो लाख हो जाएगी। यह इंटीग्रेटेड कॉल सेंटर देश का सबसे आधुनिक सेंटर है।
ऐन मौके पर जुड़ा रामपुर का नाम
पहले चरण में यह योजना10 जिलों में लॉन्च होनी थी, लेकिन ऐन मौके पर रामपुर भी इसमें जुड़ गया है। रामपुर नगर विकास एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आजम खां का क्षेत्र है। इसलिए बड़े जिलों के साथ ही इस छोटे जिले का भी नाम जोड़ दिया गया है। बाकी 10 जिले लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, मेरठ, आगरा, वाराणसी, बरेली, गोरखपुर, मुरादाबाद व झांसी हैं।
इस तरह काम करेगी परियोजना
100 नंबर पर कॉल करने पर सबसे पहले संप्रेक्षण कक्ष में फोन रिसीव होगा। यहां पूरी बातचीत रिकॉर्ड की जाएगी। इसके बाद पुलिस सहायता के लिए कॉल प्रेषण अधिकारी को भेजी जाएगी। साथ ही संबंधित पुलिस थाने को भी इसकी सूचना दी जाएगी। इसके बाद यूपी-100 जो भी गाड़ी सबसे निकट होगी उसे मौके पर भेजा जाएगा।
किसी भाषा में किया जा सकता है संपर्क
कॉल सेंटर में किसी भी भाषा में संपर्क किया जा सकता है। प्रदेश की सभी प्रमुख बोलियां जैसे भोजपुरी, अवधी, मगही, बुंदेलखंडी, बृज के साथ ही देश की सभी प्रमुख भाषाओं व विदेशी भाषाओं में भी संपर्क किया जा सकता है।
इसके लिए उन अधिकारियों को वालंटियर बनाया गया है, जिन्हें ये भाषाएं आती हैं। कॉल रिसीव करने वाले अफसर को अगर भाषा नहीं आती है तो वह उस भाषा के जानकार को कॉन्फ्रेंस में लेकर पीड़ित की मदद करेगा।
दिव्यांगों से वीडियो के जरिए संपर्क कर उनकी सांकेतिक भाषा को अनुवादक के माध्यम से समझ कर उन्हें सहायता मुहैया कराई जाएगी। इसके अलावा कॉल सेंटर में मोबाइल, लैंडलाइन से कॉल, ई-मेल, फेसबुक, ट्विटर, वॉट्सएप से भी मदद मांगी जा सकती है। नागरिक इसमें फोटो, वीडियो एवं डॉक्यूमेंट अपलोड भी कर सकेंगे।
11 माह में तैयार हुई बिल्डिंग
यूपी-100 का आधुनिक नियंत्रण कक्ष सिर्फ 11 माह के रिकॉर्ड समय में बनकर तैयार हुआ है। इसकी आधारशिला मुख्यमंत्री ने 19 दिसंबर 2015 को रखी थी। अब 19 नवंबर को मुख्यमंत्री ही इसका उद्घाटन करने जा रहे हैं।
लखनऊ में बड़ा कॉल सेंटर बनाने के साथ ही इलाहाबाद व नोएडा में इसका मिरर कंट्रोल रूम बनाया जा रहा है। लखनऊ में अगर किसी कारणवश कनेक्टिविटी फेल हो जाती है या सेंटर ठप हो जाता है तो यहां की कॉल इन दो कॉल सेंटर में ट्रांसफर हो जाएगी। इसका डाटा रिकवरी सेंटर बंगलूरू में बनाया गया है।
डीजीपी जावीद अहमद ने बताया कि परियोजना में 3200 वाहनों का बेड़ा है। इसमें 700 इनोवा व 2500 बोलेरो शामिल हैं। अगले चरण में 1800 दुपहिया वाहन भी इसमें शामिल होंगे।