लखनऊ स्थित सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) की ओर से 25 साल पहले बनाई गई दुनिया की पहली नॉन स्टेरॉयड गर्भ निरोधक दवा अब देश भर के अस्पतालों में महिलाओं को मुफ्त मिलेगी।
‘सहेली’ ब्रांडनेम से सफलता की ऊंचाई छूने वाली इस दवा को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम (एनएफपीपी) में शामिल कर लिया है। अब पूरे देश के जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ‘छाया’ नाम से यह मुफ्त वितरित की जाएगी।
परिवार नियोजन पर दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने ‘छाया’ को लॉन्च करने के दौरान इसकी घोषणा की। उन्होंने सीडीआरआई को इस दवा को विकसित करने के लिए बधाई दी।
महिलाओं को इंजेक्शन से दिलाई मुक्ति
वैज्ञानिकों में खुशी
- फोटो : Amar Ujala
सीडीआरआई ने 1991 में ‘सेंटक्रॉमैन’ के नाम से इसे रिलीज किया था। बाद में हिंदुस्तान लेटेक्स लिमिटेड ने ‘सहेली’ नाम से इसे बाजार में उतारा। इस दवा ने महिलाओं को गर्भनिरोधक इंजेक्शन से मुक्ति दिलाई। इसकी सबसे बड़ी खूबी थी कि महिलाओं में कोई साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिला।
बाद में टॉरंट फार्मा ने भी इसकी बिक्री ‘क्रॉमैन’ के नाम से शुरू की। पहले गर्भ निरोधक दवाओं में स्टेरॉयड का उपयोग होता था। प्रतिबंध होने के चलते जांच में स्टेरॉयड मिलने पर महिला खिलाड़ियों पर कार्रवाई का डर बना रहता था। ऐसे में ‘सहेली’ के आने से उन्हें स्टेरॉयड वाली गर्भ निरोधक दवाओं से छुटकारा मिला।
यह हमारे लिए गौरव का पल है। पद्मश्री वैज्ञानिक डॉ. नित्यानंद की टीम ने वर्षों के प्रयास के बाद यह गर्भ निरोधक दवा बनाई थी। इस दवा की खासियत यह है कि सप्ताह में केवल एक खुराक ही लेनी होती है। यह दवा अब ‘छाया’ के नाम से नया इतिहास लिखेगी।
-डॉ. मधु दीक्षित, निदेशिका, सीडीआरआई