इस साल इसके बजट में ही बढ़ोतरी कर दी गई है। 25 लाख में से 15 लाख रुपये रसायन के लिए, पांच लाख रुपये गैस, पांच लाख रुपये न्यूक्लिक मैग्नेटिक स्पेक्ट्रोमीटर चलाने के लिए नाइट्रोजन और हीलियम खरीदने केलिए मिले हैं।
लविवि में भले ही बीएससी और एमएससी के लिए बजट जारी हो गया है, लेकिन शोधार्थियों को अभी भी कोई फायदा नहीं हुआ है। शोधार्थी बिना किसी बजट के ही अपना शोध पूरा कर रहे हैं। विभागाध्यक्ष प्रो. पद्मकांत के अनुसार वे इसके लिए भी प्रयास कर रहे हैं।
बजट बढ़ने से होगी सहूलियत
कुलपति ने प्रयोगशाला की समस्या को समझते हुए बजट बढ़ा दिया है। इसके लिए विभाग उनका आभारी है। अब बीएससी और एमएससी के सभी प्रैक्टिकल आसानी से हो सकेंगे। शोधार्थियों के लिए फिलहाल अलग से किसी बजट की व्यवस्था नहीं है, लेकिन उनका काम चल जाता है। - प्रो. पद्मकांत, विभागाध्यक्ष, रसायन विज्ञान विभाग, लविवि