ब्रांडेड के नाम पर मोटी कमाई के लिए बेखौफ धंधेबाज मात्र 50 पैस के खर्च पर मिलावटी ब्रांडेड खाद्य सामग्री बाजार में खपा रहे हैं।
सेहत के लिए खतरनाक मिलावटी सरसों के तेल की शहर में हो रही बिक्री के खुलासे के बाद एफएसडीए प्रशासन में भी हड़कंप है।
प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए करीब आधा दर्जन खाद्य नमूनों में सेहत के लिए खतरनाक मिलावट उजागर हुई।
अनसेफ कैटेगरी में आए इन खाद्य नमूनों की निगेटिव रिपोर्ट को अब आगे की कार्रवाई के लिए एफएसडीए आयुक्त के पास भेजा गया है। इनकी संस्तुति के बाद आरोपियों को जेल भेजने/जुर्माना लगाने की कार्रवाई होगी।
शहर में मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री रोकने की कवायद फिलहाल नमूना सैंपलिंग तक सिमटी होने का फायदा उठा धंधेबाज आम लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर तिजोरी भरने में लगे हैं।
इसके लिए ब्रांडेड आइटमों के नाम से मिलते जुलते रैपर छपवा कर मिलावटी सरसों तेल, वनस्पति घी, रिफाइंड ऑयल, बेसन, मैदा व सब्जी मसाले बाजार में खपाये जा रहे हैं। मिलावटी तेल के 15 किलो के हर टिन पर तीन से चार सौ रुपया तक का मुनाफा कमाया जा रहा है।
बीते दिनों राजधानी में संचालित अभियान के दौरान पांडेयगंज व सीतापुर रोड पर दो अलग-अलग दुकानों से लिए गए सरसों तेल के नमूनों में खतरनाक कलर व केमिकल मिलने की पुष्टि हुई। इसके साथ ही सब्जी बनाने में इस्तेमाल किए जाने वाले मिर्च पाउडर, बेसन व मावा के नमूनों में भी मिलावट पाई गई।
कम खर्च में कई गुना मुनाफा
ब्रांडेड के नाम पर मिलावट का धंधा करने वाले दर्जनों ब्रांडेड उत्पाद से मिलते जुलते नाम के रैपर तैयार कर मिलावटी तेल को असली बताकर बेच रहे हैं। मुनाफाखोर ब्लेंडेड इडिबिल वेजीटेबल ऑयल को मस्टर्ड व रिफाइंड बताकर बेचते है।
टिन पर चस्पा किए जाने वाले एक स्टीकर छपवाने का खर्चा मात्र मात्र 25 से 50 पैसा आता है। इन स्टीकर में ब्रांडेड कंपनी के जैसा मिलता-जुलता लोगो बनाया जाता है। इनकी लिखाई भी इतनी छोटी होती है कि पढ़ने में न आए।
मिलावटी खेल का गणित
सूत्रों के अनुसार कानपुर व लखनऊ से जुड़े बड़े धंधेबाज मिलावटी खाद्य तेल अमीनाबाद, ऐशबाग, फतेह अली तालाब, चौक, मड़ियांव व इंदिरा नगर सहित अन्य इलाकों में खपा रहे हैं।
राइस ऑयल के आधार पर तैयार ब्लेंडेड इडिबिल वेजीटेबल ऑयल का एक टिन जहां सात से आठ सौ रुपया में बिकता है वहीं ब्रांडेड कंपनी का सरसों तेल व रिफाइंड का टिन 1100 से 1450 रुपया तक बिकता है। धंधेबाज इसमें घुलनशील रंग के साथ बटर ऑयल व हाइड्रोसायनिक एसिड मिलाने से भी नहीं चूकते।
ब्रांडेड कंपनियां भी पीछे नहीं
जानकार बताते हैं कि ब्रांडेड कंपनियां भी बिलिंग के झंझट से बचने के लिए एक समान न्यूट्रीशियन सामग्री व गुणवत्ता वाले रिफाइंड अथवा सरसों तेल के अलग-अलग नाम व दर वाले उत्पाद बाजार में सप्लाई करती हैं।
इन ब्रांड्स में सौ से दो सौ रुपये का अंतर होता है। ऐसे में धंधेबाज कंपनी से कम दर वाले प्रोडक्ट में पुराना रैपर हटाकर अधिक दाम वाला नया रैपर लगाकर मुनाफा कमाते हैं।
नमूना सैंपलिंग तक सिमटी रोकथाम कवायद
एफडीए व पीएफए एक्ट के तहत खाद्य पदार्थों में मिलावट व पैकेजिंग एक्ट के उल्लंघन पर सीधी कार्रवाई का प्रावधान है।
इस साल 1 अप्रैल से 31 अगस्त के बीच मिलावटखोरी रोकने के चले अभियान के तहत जिले भर में अब तक पौने दो सौ से अधिक नमूनों को प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा गया।
इसमें मुख्य तौर पर दूध, देसी घी, मावा, बर्फी, पनीर, बेसन के साथ अरहर दाल, दलिया, उरद दाल, हल्दी, धनिया इत्यादि के नमूने शामिल थे। प्रयोगशाला में लेटलतीफी के चलते इनमें से अब तक मात्र 78 नमूनों की रिपोर्ट ही आई है।
उसमें भी 33 नमूनों की रिपोर्ट में गड़बड़ी उजागर हुई। इसमें 27 नमूने जहां सेफ कैटेगरी के हैं वहीं 6 नमूने अनसेफ कैटेगरी के हैं।
क्या है सेफ अनसेफ श्रेणी
एफएसडीए एक्ट में जांच नमूनों को दो कैटेगरी में रख कर कार्रवाई का प्रावधान है। सेफ कैटेगरी में ऐसे खाद्य नमूने आते हैं जिनमें जांच में बिलो स्टैंडर्ड व पैकेजिंग एक्ट की खामियां उजागर होती है।
ऐसे नमूनों में संचालक के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दर्ज कर सिर्फ जुर्माने का प्रावधान है जबकि अनसेफ कैटेगरी में वे नमूने आते हैं जिनमें जांच में सेहत के लिए हानिकारक मिलावट की पुष्टि होती है। इन पर जुर्माने के साथ सजा का भी प्रावधान है।